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अंबाह विधानसभा सीट: किन्नर नेहा वोट कटवा की भूमिका में, बढ़ेगी भाजपा-कांग्रेस की मुश्किलें

29 वर्षीय किन्नर नेहा एक बार फिर मुरैना जिले की अंबाह विधानसभा सीट से किस्मत आजमाने जा रही हैं। इस बार भी वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में होंगी।

नेहा के मैदान में उतरने से मुकाबला चतुष्कोणीय हो गया है
भोपाल, बिच्छू डॉट कॉम।
मध्यप्रदेश की 28 सीटों पर उपचुनाव होना है, मुख्य मुकाबला भले ही भाजपा-कांग्रेस में हो, लेकिन विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी भी मैदान में उतरे हुए हैं, वही निर्दलीय भी मुश्किलें बढ़ाने से पीछे नही हट रहे है, जिसके चलते वोटों के कटने का खतरा बना हुआ है। इसी कड़ी में 2018 विधानसभा चुनावों की तरह ही अब उपचुनाव में भी कि न्नर प्रत्याशी ताल ठोंक रहे हैं। खास बात ये है कि किन्नर नेहा एक बार फिर मुरैना जिले की अंबाह विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमाने जा रही हैं। इस बार भी वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में होंगी, ऐसे में भाजपा-कांग्रेस के लिए जीत हासिल करना बड़ी चुनौती होगी। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को होने की संभावना है चुंकी पिछले चुनाव में नेहा दूसरे नंबर पर रही थी और भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था। दरअसल, मुरैना जिले की अंबाह विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला रोचक होने वाला है, जहां कांग्रेस से सत्यप्रकाश सखवार , भाजपा से संभावित उम्मीदवार कमलेश जाटव और बसपा से भानूप्रताप सिंह सखवार मैदान में है, वही अंबाह से निर्दलीय के रूप में किन्नर नेहा चुनाव लड़ रही है। उन्होंने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट के लिए शुक्रवार से अपना चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है। नेहा के मैदान में उतरने से मुकाबला चतुष्कोणीय हो गया है।
2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कमलेश जाटव से मात्र 7,547 मतों से पराजित हुई थीं:
नेहा के मैदान में उतरने से इस बार भी पिछले चुनाव की तरह मुकाबला रोचक हो सकता है, क्योंकि वह भाजपा, कांग्रेस एवं बसपा को इस सीट पर कड़ी टक्कर दे सकती हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में नेहा ने भाजपा को कड़ी शिकस्त दी थी और तीसरे स्थान पर पहुंचा दिया था। बता दे कि नेहा का संबंध बेडिय़ा समाज से है। यहां इस वर्ग के मतदाता ज्यादा संख्या में हैं। वह इलाके में ‘नेहा किन्नर’ के नाम से मशहूर हैं। नवंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अंबाह विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और दूसरे स्थान पर रही थीं। तब वह कांग्रेस के उम्मीदवार कमलेश जाटव से मात्र 7,547 मतों से पराजित हुई थीं। देश की पहली किन्नर विधायक शबनम मौसी मध्यप्रदेश से ही बनी थीं। इसके अलावा, देश में मध्य प्रदेश से ही पहली किन्नर कमला जान महापौर बनी थीं।

अम्बाह विधानसभा सीट
वोटर- 2,22,060
महिला वोटर-1,02,538
पुरुष वोटर- 119517
अम्बाह विधानसभा क्षेत्र की प्रमुख जातियां/उप जातियां
जातियां-(राजपूत, ब्राह्मण, ओबीसी और दलित)
राजपूत- तोमर
ब्राह्मण- मिश्रा, शर्मा, उपाध्याय और ऋषीश्वर
ओबीसी- बघेल, राठौर, गुर्जर
अनुसूचित जाति- जाटव, माहौर, कोरी

इतिहास में पहला मौका- 28 सीटों पर उपचुनाव-मध्य प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका है जब एक साथ 28 सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे है। यह चुनाव मध्यप्रदेश की तस्वीर को साफ करेंगें, जहां भाजपा के लिए सरकार बचाना चुनौती है, वही कांग्रेस के लिए कमबैक करना। कांग्रेस ने अब तक 24 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया ,चार सीटों पर मंथन चल रहा है वही दूसरी तरफ भाजपा ने अबतक अपने पत्ते नही खोले है, हालांकि संभावना जताई जा रही है कि 25 सीटों पर वही भाजपा के उम्मीदवार होंगे जो हाल ही में कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा में शामिल हुए है। मुकाबला रोचक होने वाला है, चुंकी मैदान में बसपा भी है।

मप्र का भविष्य तय करेंगे ये उपचुनाव: इतिहास में यह पहला मौका है जब मप्र की 28 सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे है।यह चुनाव मप्र का भविष्य़ तय करेंगे। 25 सीटे सिंधिया समर्थकों और पूर्व विधायकों के इस्तीफे से खाली हुई है। वही तीन सीटे विधायकों के निधन के बाद खाली हुई है। इस बार का चुनाव दोनों ही दलों के लिए महत्वपूर्व माना जा रहा है, जहां भाजपा के लिए सरकार बचाना चुनौती है वही कांग्रेस के लिए कमबैक करना।वर्तमान में 230 सदस्यों वाली विधानसभा में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं है, क्चछ्वक्क को पूर्ण बहुमत के लिए जहां 9 विधानसभा क्षेत्रों में जीत दर्ज करनी है, वहीं कांग्रेस को सभी 28 स्थानों पर जीत हासिल करनी होगी, तभी उसे पूर्ण बहुमत हासिल हो पाएगा।
इन सीटों पर हैं उपचुनाव:
मप्र में 28 सीटों पर उपचुनाव हैं। 28 में 25 सीटें कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद खाली हुआ है। वहीं, 3 सीटें विधायकों के निधन से खाली हैं। सुमावली, मुरैना, दिमनी अंबाह, मेहगांव, गोहद, ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व, डबरा, भांडेर, करेरा, पोहरी, बामोरी, अशोकनगर, मुंगावली, सुरखी, सांची, अनूपपुर, सांवेर, हाटपिपल्या, सुवासरा, बदनावर, आगर-मालवा, जौरा, नेपानगर, मलहारा, मंधाता और ब्यावरा में उपचुनाव हैं।

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नेहा के मैदान में उतरने से मुकाबला चतुष्कोणीय हो गया हैभोपाल, बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश की 28 सीटों पर उपचुनाव होना है, मुख्य मुकाबला भले ही भाजपा-कांग्रेस में हो, लेकिन विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी भी मैदान में उतरे हुए हैं, वही निर्दलीय भी मुश्किलें बढ़ाने से पीछे नही हट रहे है, जिसके चलते वोटों
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