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इस चूहे ने जीता गोल्ड मेडल, जानें ऐसा क्या तीर मारा!

आज कोई देश भले ही जानवरों का सम्मान करे न करे किंतु कुछ देशों में छोटे-से जीवों को भी सम्मान दिया जाता है।

जमीन में छुपे विस्फोटकों और सुरंग ढ़ुंढऩेवाले मागावा नामक चूहे का लंडन में गोल्ड मेडल से सम्मान किया गया। प्राणियों के सम्मान के लिए काम करनेवाली संस्था पीपल्स डिस्पेन्सरी फोरेंसिक एनिमल द्वारा यह मेडल दिया गया था।

मागावा नामक चूहे ने यह पराक्रम एशियाई देश कम्बोडिया में कर दिखाया था। कम्बोडिया, लाओस, आफ्रि का के कई देशों वगैरह में जमीन में कई सुरंगें बिछी हैं। ये सुरंगें हर वर्ष लाखों लोगों की जान लेती हैं अथवा घायल करती हैं। क्योंकि युद्घ या संघर्ष के समय सुरंग बिछाना सरल है, किंतु उसे निकालना कठिन है। इसलिए अधिकतर सुरंगों को जस के तस छोड़ दी जाती है, जो बाद में जानलेवा साबित होता है।

चूहों को प्रशिक्षित करके उनके पास से विस्फोटकों तथा शरीर में रहे टीबी का रोग ढ़ूंढ़ रहा टीबी का रोग ढ़ुंढऩे का काम करनेवाली संस्था एन्टी-पर्सोनल लैंडमाइन्स डिटेक्शन प्रोडक्ट डेवलपमेन्ट द्वारा यह सम्मान दिया गया था।

मागावा यह आफ्रिकन कद्दावर चूहा है और उसे इस संस्था ने प्रशिक्षण दिया है। आफ्रिका में होनेवाले इस जायन्ट पाउच रोडन्ट का वजन सवा किलोग्राम तक का और कद डेढ़-पौने दो फीट तक का होता है। प्रशिक्षण के बाद कम्बोडिया में उसने 1.41 लाख चौरस मीटर जमीन सूंघकर विस्फोटक ढ़ुंढ़ निकाला था। साथ-साथ टीबी के रोगियों को भी पहचानने में सफलता प्राप्त हुई थी।

सुरंगों को ढ़ूंढ़कर उसे निष्क्रिय करने की कार्यवाही करनेवाली इस संस्था के पास लैंडमाइन्स ढ़ूंढऩे के लिए 45 और टीबी पहचानने के लिए 31 चूहों की पूरी फौज है। दुनिया के कोने-कोने में जहां जरुरत पड़ती है वहां इस चूहे की टीम को काम पर लगाया जाता है।

संस्था की जानकारी के अनुसार 77 वर्ष के इतिहास में ज्योर्ज क्रॉस के समकक्ष माना जानेवाला गोल्ड मेडल पानेवाला यह प्रथम चूहा है। मागावा अब तो निवृत्त होने की उम्र में पहुंचा है, किंतु उसकी तेजी इतनी है कि टेनिस का मैदान यह 30 मिनट में सुंघ लेता है।

सामान्य तौर पर चूहे को लैंडमाइन तक निकालने के लिए एक-दो वर्ष की कड़ी प्रशिक्षण देनी होती है। चूहे से अधिक मेहनत उनके ट्रेनर को करनी पड़ती है। अकेले कंबोडिया में ही 1975 से 1988 के बीच 90 लाख सुरंगें बिछाई गई थीं।

इसके कारण अभी तक 64 हजार जानें गई हैं, क्योंकि कोई व्यक्ति अज्ञात जमीन में दबी सुरंग पर पैर रखे तो उसके बाद अधिकतर उनकी मौत ही होती है। मौत नहीं हो तो गंभीर तौर पर घायल हो जाते हैं। चूहे के केस में यह खतरा घट जाता है। चूहे का वजन इतना नहीं होता कि वह सुरंग पर पहुंचे तो भी विस्फोट कर पाए।

आज कोई देश भले ही जानवरों का सम्मान करे न करे किंतु कुछ देशों में छोटे-से जीवों को भी सम्मान दिया जाता है। जमीन में छुपे विस्फोटकों और सुरंग ढ़ुंढऩेवाले मागावा नामक चूहे का लंडन में गोल्ड मेडल से सम्मान किया गया। प्राणियों के सम्मान के लिए काम करनेवाली संस्था पीपल्स डिस्पेन्सरी फोरेंसिक एनिमल द्वारा

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