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केंद्र ला रहा नया कानून, किराएदार ने कब्जा नहीं छोड़ा तो देना होगा चार गुना किराया

केंद्र ला रहा नया कानून, किराएदार ने कब्जा नहीं छोड़ा तो देना होगा चार गुना किराया

रायपुर. मकान मालिक और किराएदारों के बीच अक्सर होने वाले विवाद का निपटारा आसानी से नहीं हो पाता। वजह ये है कि इस तरह के मामलों को सुलझाने के लिए बहुत स्पष्ट कानूनी व्यवस्था नहीं है, लेकिन यह स्थिति अब बहुत समय तक नहीं बनी रहने वाली है। केंद्र सरकार का आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय जनसामान्य द्वारा निर्मित स्वयं के आवासों को किराए पर देने के संबंध में आदर्श किराएदारी अधिनियम 2020 लाने की तैयारी है। इस अधिनियम में ये प्रावधान भी है कि अगर कोई किराएदार किराएदारी की अवधि समाप्त होने पर परिसर को खाली करने में चूक करता है तो मालिक चार गुना किराए का हकदार होगा।

छत्तीसगढ़ को भी भेजा गया विधेयक का प्रारूप

केंद्र सरकार ने विधेयक के प्रारूप की हिंदी ए‌वं अंग्रेजी में प्रतिलिपि छत्तीसगढ़ सरकार को भी भेजी है। प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने यह प्रारूप राज्य में आम जनता के लिए जारी किया है। आदर्श किराएदारी अधिनियम के संबंध में आम लोग अपने सुझाव लिखित में या नगरीय प्रशासन विभाग के ई-मेल पर या नवा रायपुर स्थित विभाग के कार्यालय में 31 अक्टूबर तक जमा कर सकते हैं।

जनसामान्य से लिए जाएंगे सुझाव

केंद्र सरकार ने यह विधेयक तैयार कर सभी प्रदेशों तथा केंद्रशासित राज्यों को भेजा है। विधेयक के प्रारूप पर जनसामन्य से राय ली जाएगी। राय मिलने के बाद अधिनियम में आवश्यक सुझावों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद विधेयक पास किया जाएगा। केंद्र से विधेयक पारित होने के बाद उसे सभी राज्यों की विधानसभाओं या विधानमंडलों में भी पारित किया जाएगा। इसके साथ ही यह कानून देशभर में लागू हो जाएगा।

ये हैं प्रावधान के कुछ बिंदु

आदर्श किराएदारी अधिनियम के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं में यह शामिल है कि यह विधेयक पारित होने के बाद परस्पर सहमत शर्तों के आधार पर लिखित रूप से करार के बिना कोई परिसर किराए पर नहीं दिया जा सकता है। यह विधेयक रिहायशी तथा व्यावसायिक किराएदारों पर लागू होगा। यह सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों के शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों पर समान रूप से लागू होगा। किराया, भू-स्वामी तथा किराएदार के बीच पारस्परिक करार द्वारा तय किया जाएगा। किराएदार तथा मालिक के विवाद के निपटारे के लिए एक फास्ट ट्रैक अर्ध न्यायिक तंत्र का प्रावधान होगा। विधेयक बिना किसी आर्थिक सीमा के सभी किराएदारों पर लागू होगा। किराएदारी की बकाया अवधि के लिए किराएदारी करार की शर्त भू-स्वामी को उत्तराधिकारियों के साथ किराएदारी पर भी बाध्यकारी होगी। भू-स्वामी और किराएदार के बीच अनुपूरक करार किए बिना उप किराएदारी की अनुमति नहीं होगी। अधिनियम में यह प्रस्ताव भी रखा गया है कि भू-स्वामी प्रथम दो माह के दोहरे किराए का हकदार है और इसके बाद किराएदारी की अवधि समाप्त होने पर परिसर को खाली करने के लिए किराएदार द्वारा चूक किए जाने की स्थिति में चार गुना मासिक किराए का हकदार है।

मकान मालिक और किराएदारों के बीच विवादों का होगा निपटारा

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