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कोरोना फेफड़ों को बना देता है पत्थर, एटोप्सी रिपोर्ट के बाद डॉक्टर का खुलासा

कोरोना फेफड़ों को बना देता है पत्थर, एटोप्सी रिपोर्ट के बाद डॉक्टर का खुलासा

कोरोना के कारण शरीर पर तरह-तरह की बीमारियों का असर होता है। इस बीमारी मेें हमारे शरीर के फेफड़ों पर अधिक प्रभाव पड़ता है।

कोरोना वायरस की मारक की वैक्सीन अभी तक सामान्य लोगों तक नहीं पहुंची है। कोरोना वायरस के रोगियों की मौत के बाद पोस्टमॉर्टम करके रोग का प्रभाव जानने के लिए भी स्वीकृति नहीं दी गई है, किंतु राज्य में एकमात्र राजकोट की पीडीयू मेडिकल कॉलेज के फोरेन्सिक विभाग को कोरोना के रोगियों की शव की ओटोप्सी करने हेतु स्वीकृति दी गई है।

अभी तक 6 रोगियों के देह पर ओटोप्सी हुई है। इतना बड़ा जोखिम लेने के पीछे का कारण उपचार पद्घति में अधिक पैमाने में सुधार लाना है। इस परीक्षण के मामले में फोरेन्सिक मेडिसिन विभाग के अधिकारी डॉ. हेतल क्याडा ने कहा कि संशोधन की जा सके और बड़ी रिपोर्ट बनाई जा सके इतना अभी परीक्षण नहीं किया गया, किंतु निष्कर्ष यह मिला है कि कोरोना वायरस के कारण फेफड़े में फाइब्रोसिस बढ़ जाता है।

(PC : careers360.mobi)

जब कोरोना रोगी के शरीर से फेफड़े निकाले गए तभी मानो पत्थर उठाया हो ऐसा लग रहा था। फाइब्रोसिस तो टी.बी. और न्युमोनिया में भी होता है किंतु फेफड़े में वह ऊपर और नीचे के भाग में ही होता है, किंतु कोरोना में इसकी गहन असर दिखाई दी। पूरे फेफड़े में फाइबेरसिस हुआ है। जो एटोप्सी के दौरान दिखाई दिया है। अब इस पर एक रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही सही कारण जानने को मिलेगा। रोग प्रतिकारक शक्ति जब सक्रिय होता है तो पहला प्रभाव फेफड़े पर होता है। वायरस का बुरा प्रभाव तथा टिश्यु रिपेयर करने हेतु प्रतिक्रिया के कारण फेफड़े की महीन नलियों में द्रव्य भर जाता है। जो बाद से जम जाता है। इससे फेफड़े में कोई स्थिति स्थापकता नहीं रहती। धीरे-धीरे वह कठिन होती जाती है। फाइब्रोसिस सभी रोग में अलग-अलग तौर पर काम करता है। यह किस तरह से बनता है इस संबंध में संशोधन चल रहा है।

द्रव्य जम जाने से फेफड़े की नली में गांठ हो जाती है। फेफड़े स्थिति स्थापकता गंवा देती है जिससे व्यक्ति का शरीर बिगड़ता है। धीरे-धीरे फेफेड़े का रंग बदलने लगता है। कभी तो इसमें छिद्र पड़ जाता है। फेफड़ा किसी ताजी ब्रेड की तुलना में भी सोफ्ट होती है। इससे यह स्मूथ तौर पर ऑक्सिजन और कार्बन डायोक्साइड की लेन-देन कर सकती है। फाइब्रोसिस होने के कई कारण और प्रहार होते हैं। सभी में सख्ती का निष्कर्ष अलग-अलग हो सकता है।

कोरोना के कारण शरीर पर तरह-तरह की बीमारियों का असर होता है। इस बीमारी मेें हमारे शरीर के फेफड़ों पर अधिक प्रभाव पड़ता है। कोरोना वायरस की मारक की वैक्सीन अभी तक सामान्य लोगों तक नहीं पहुंची है। कोरोना वायरस के रोगियों की मौत के बाद पोस्टमॉर्टम करके रोग का प्रभाव जानने के लिए भी

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