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क्या आप 50 लाख से अधिक की बिक्री किसी एक ही व्यापारी को करते हैं? TCS का ये नियम जान लें

क्या आप 50 लाख से अधिक की बिक्री किसी एक ही व्यापारी को करते हैं? TCS का ये नियम जान लें

आयकर के 2020 के पेश की गई वित्त बिल में टैक्स का कलेक्शन बढ़ाने के लिए तथा अतिशय होनेवाली करचोरी रोकने के लिए आयकर की धारा 2060 में कुछ संशोधन दर्ज की गई है।

50 लाख से अधिक का विक्रय एक ही व्यापारी को किया जाएगा तो 1 अक्टूबर से 0.75 प्रतिशत के तौर पर टीसीएस भरना पड़ेगा। सात लाख से अधिक का फोरेन एक्सचेंज खरीदनेवाले को पांच प्रतिशत टीसीएस भरना पड़ेगा। अपने बच्चों को विदेश पढऩे के लिए भेजनेवाले माता-पिता टीटीएस के कानून से प्रभावित होंगे क्योंकि उन्हें बच्चों के लिए फोरेन एक्सचेंज खरीदना पड़ता है। सरकार द्वारा कर चोरी रोकने के लिए यह नियम लागु किया गया है। वहीं इसके कारण करदाताओं की परेशानियां बढ़ेगी।

टीसीएस के अमल और इसकी व्यवस्था के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए टैक्स एडवाइजर प्रमोद पोपट ने कहा कि आयकर के 2020 के पेश की गई वित्त बिल में टैक्स का कलेक्शन बढ़ाने के लिए तथा अतिशय होनेवाली करचोरी रोकने के लिए आयकर की धारा 2060 में कुछ संशोधन दर्ज की गई है। इन संशोधनों के अनुसार कोई व्यापारी जब इस विक्रय का भुगतान स्वीकार करता है तो ऐसे व्यापारी को 1 अक्टूबर के बाद विक्रय का जोड़ जब 50 लाख या उससे अधिक होगा तब ऐसे अतिरिक्त हरेक विक्रय पर उसे 0.075 प्रतिशत के तौर पर अतिरिक्त रकम माल लेनेवाले के पास से विक्रय कीमत के अलावा वसूली करनी होगी। जिसकी टीसीएस स्वरुप में आयकर में जमा कराना होगा।

इसके अलावा ऐसे व्यापारी के पास से पान या आधार नंबर भी प्राप्त करना होगा। यदि खरीदनेवाले व्यापारी के पास पान या आधार नंबर नहीं हो तो टीसीएस एक प्रतिशत के तौर पर भरना होगा। यह संशोधन 50 लाख की सीमा की गणना के पहले दिन से गिनना होगा, अर्थात 1 अप्रैल से सितम्बर तक कोई एक व्यापारी को 40 लाख का भुगतान 30 सितम्बर तक मिलेगा और उसके बाद अक्टूबर महीने में अन्य बीस लाख का भुगतान स्वीकारें तो उसे 60 लाख पर 0.075 प्रतिशत के तौर पर 4500 रुपए इस केस में पान या आधार पेश नहीं करनेवाले व्यापारी को ऐसे केस में 45 हजार टीसीएस नहीं भरना पड़ेगा। अधिकतर व्यापारी विशेष तौर पर होलसेल का बिजनेस करते हैं जिससे व्यापारियों और उसमें भी बुलियन के व्यापारियों द्वारा सोफ्टवेयर में सुधार करना होगा।

50 लाख की तुलना में अधिक भुगतान आया है या नहीं इसके लिए व्यापारियों को अपने सोफ्टवेयर में भी सुधार करना होगा। इसकी वजह है कि यदि टीसीएस वसूल करके जमा नहीं किया जाए तो आयकर विभाग द्वारा 1 अक्टूबर से दंडनीय कार्यवाही की जाएगी। इसके लिए 50 लाख के ऊपर के भुगतान के लिए लगातार इन्वॉइस या बिल चेक करने के बजाय व्यापारियों द्वारा अपने सोफ्टवेयर में इसकी गणना हो इस अनुसार व्यवस्था आगामी दिनों में तैयार करनी होगी।

बच्चों को विदेश पढऩे के लिए भेजनेवाले माता-पिता नए कानून से प्रभावित होंगे

विदेश में रहनेवाले और पढ़ाई करनेवाले छात्रों के लिए भी यह विषय बहुत ही चिंता का विषय बना रहेगा, क्योंकि अब 1 अक्टूबर से फोरेन रेमिटन्स की कीमत यदि सात लाख से अधिक होगी तो फोरेन एक्सचेंज देनेवाली कंपनियों द्वारा फोरेन करन्सी खरीदनेवाले के पास से पांच प्रतिशत अधिक रकम वसूलेगी। बैंकिंग चैनल से भेजना चाहते होंगे तो भी ग्राहक के पास से पांच प्रतिशत टीसीएस वसूली जाएगी, अर्थात कि अब यदि किसी अभिभावक ने अपने फोरेन में पढऩे जानेवाले बच्चे को 10 लाख का रेमिटन्स भेजना चाहते हैं तो इसके लिए 50,000 रुपए टीसीएस भरना पड़ेगा। यदि माल खरीदी या फोरेन एक्सचेंज खरीदना दोनों में से एक भी लेनदेन आयकर के योग्य आय नहीं है, तो भी ऐसा टीसीएस वसूल किया जा रहा है। टीसीएस चुकानेवाले आयकर रिटर्न्स में इसकी जानकारी पेश करके रिफंड प्राप्त किया जा सकेगा।

आयकर के 2020 के पेश की गई वित्त बिल में टैक्स का कलेक्शन बढ़ाने के लिए तथा अतिशय होनेवाली करचोरी रोकने के लिए आयकर की धारा 2060 में कुछ संशोधन दर्ज की गई है। 50 लाख से अधिक का विक्रय एक ही व्यापारी को किया जाएगा तो 1 अक्टूबर से 0.75 प्रतिशत के तौर पर

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