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गुजरात : मेडिकल विद्यार्थियों को गांवों में कोरोना संबंधी सेवाएं देनी होंगी, सरकार का निर्णय

गुजरात : मेडिकल विद्यार्थियों को गांवों में कोरोना संबंधी सेवाएं देनी होंगी, सरकार का निर्णय

कोरोना के कारण लोगों की हालत पतली है। साथ ही कोरोना वॉरियर्स की कमी को ध्यान में रखकर जरुरी आयोजन किया गया है।

कोरोना के कारण देश में मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ की हालत दयनीय हो गई है। गांव में मेडिकल स्टाफ की कमी के कारण मेडिकल के छात्रों को गांव में कोरोना की कार्यवाही के लिए भेजने का निर्णय किया गया है। सरकार के निर्णय से छात्रों में नाराजगी दिख रही है।

नई सिविल और स्मीमेर मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई करनेवाले दूसरे और तीसरे वर्ष के छात्रों को गांवों में भी कोरोना की कार्यवाही करनी पड़ेगी। इस तरह स्वास्थ्य विभाग ने परिपत्र जारी किया है। स्वास्थ्य विभाग के निर्णय के कारण छात्रों में नाराजगी दिखी है। स्वास्थ्य विभाग के परिपत्र में जानकारी है कि अब एमबीबीएस के दूसरे और थर्ड यर पार्ट-1 और 2 के छात्रों को ग्राम्य विस्तार में कोरोना की कार्यवाही में लिया जा सकेगा।

छात्र को परिवहन, पीपीई किट, रहने और खाने समेत सुविधाएं देनी होगी। सूरत में फिलहाल नई सिविल और स्मीमेर मेडिकल कॉलेजों ने छात्रों को कार्यवाही नहीं सौंपी है किंतु आगामी दिनों में छात्रों को कार्यवाही सौंपने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि शहरी विस्तार के बाद कोरोना का संक्रमण बढऩे की घटना जिला और उसमें भी विशेष तौर पर ग्राम्य स्तर पर बढ़ रही है, ऐसे में रोगियों को तेजी से समीप में ही उपचार मिले इसके लिए व्यवस्था करने हेतु राज्य सरकार ने कवायद शुरु की है। इसके अनुरुप ही राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेज में दूसरे और तीसरे वर्ष में पढ़ाई करनेवाले छात्रों को आवश्यक तौर पर ग्राम्य स्तर पर इन्टर्नशिप करने का परिपत्र जारी किया है। इसके कारण आगामी दिनों में मेडिकल कॉलेज के छात्रों द्वारा गांवों में चिकित्सकीय उपचार देने हेतु जाने की स्थिति उत्पन्न हुई है।

कोरोना के कारण लोगों की हालत पतली है। साथ ही कोरोना वॉरियर्स की कमी को ध्यान में रखकर जरुरी आयोजन किया गया है। कोरोना के कारण देश में मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ की हालत दयनीय हो गई है। गांव में मेडिकल स्टाफ की कमी के कारण मेडिकल के छात्रों को गांव में कोरोना की कार्यवाही

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