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गो रूर्बन यात्रा : देखा और समझा महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi)के आदर्शों पर बना एक गांवगो रूर्बन यात्रा : देखा और समझा महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi)के आदर्शों पर बना एक गांव

सोहागपुर। गो रूर्बन यात्रा (Go Rurban Yatra) के तीसरे दिन गांधी ग्राम छेड़का में ग्राम वासियों के साथ संवाद कर जाना किस प्रकार वो जैविक खेती कर रहे हैं। छेड़का गांव में 42 घर हैं और गांव की कुल आबादी 450 है। यात्रा के प्रतिभागियों ने 6-7 घरों में जाके वहां रहने वालों को करीब से जानने की कोशिश की।
छेड़का गांव को आरके पालीवाल (RK Paliwal) ने 5 साल पहले गोद लिया था, उस समय गांव की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। आज 5 साल के प्रयासों के बाद गांव में बेहतर जल प्रबंधन है और पानी की समस्या कम हुई है। साथ ही सभी ने अरण्यानी फार्म (Aranyani Farm)का भ्रमण किया जहां पर मौजूद हेमंत (Hemant)ने वहां के आदिवासी जीवन के बारे में बताया कि किस प्रकार वहां के लोग जैविक खेती (Organic Farming)और प्राकृतिक खेती (Natural Farming)कर रहे हैं। दोपहर के आदिवासी भोजन के बाद यात्रा अपने अगले पड़ाव सलकनपुर (Salkanpur) के पास भिलाई गांव की तरफ बढ़ गई। गो रूर्बन एकता परिषद (Ekta Parishad) और अंश हैप्पीनेस सोसाइटी (Ansh Happyness Society)द्वारा शुरू की गई, एक पहल है जिसका उद्देश्य ग्राम और शहर की बढ़ती दूरियों को कम करना और आपसी समझ बनाना है। गो रूर्बन द्वारा इससे पहले 7 शिविरों का आयोजन किया है।

सोहागपुर। गो रूर्बन यात्रा (Go Rurban Yatra) के तीसरे दिन गांधी ग्राम छेड़का में ग्राम वासियों के साथ संवाद कर जाना किस प्रकार वो जैविक खेती कर रहे हैं। छेड़का गांव में 42 घर हैं और गांव की कुल आबादी 450 है। यात्रा के प्रतिभागियों ने 6-7 घरों में जाके वहां रहने वालों को करीब से जानने की कोशिश की।
छेड़का गांव को आरके पालीवाल (RK Paliwal) ने 5 साल पहले गोद लिया था, उस समय गांव की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। आज 5 साल के प्रयासों के बाद गांव में बेहतर जल प्रबंधन है और पानी की समस्या कम हुई है। साथ ही सभी ने अरण्यानी फार्म (Aranyani Farm)का भ्रमण किया जहां पर मौजूद हेमंत (Hemant)ने वहां के आदिवासी जीवन के बारे में बताया कि किस प्रकार वहां के लोग जैविक खेती (Organic Farming)और प्राकृतिक खेती (Natural Farming)कर रहे हैं। दोपहर के आदिवासी भोजन के बाद यात्रा अपने अगले पड़ाव सलकनपुर (Salkanpur) के पास भिलाई गांव की तरफ बढ़ गई। गो रूर्बन एकता परिषद (Ekta Parishad) और अंश हैप्पीनेस सोसाइटी (Ansh Happyness Society)द्वारा शुरू की गई, एक पहल है जिसका उद्देश्य ग्राम और शहर की बढ़ती दूरियों को कम करना और आपसी समझ बनाना है। गो रूर्बन द्वारा इससे पहले 7 शिविरों का आयोजन किया है।

सोहागपुर। गो रूर्बन यात्रा (Go Rurban Yatra) के तीसरे दिन गांधी ग्राम छेड़का में ग्राम वासियों के साथ संवाद कर जाना किस प्रकार वो जैविक खेती कर रहे हैं। छेड़का गांव में 42 घर हैं और गांव की कुल आबादी 450 है। यात्रा के प्रतिभागियों ने 6-7 घरों में जाके वहां रहने वालों को करीब

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