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ग्लोबल वोर्मिंग का समाधान अवश्य ही सायकलिंग ही है : मनसुख मांडविया

सायकल चलाने से पर्यावरण पर हम अहसान कर सक ते हैं। देश में आज कार व बड़े-बड़े वाहन चलाए जाते हैं जिसमें से प्रदूषण फैलने का डर है। दूसरी ओर सायकल यह प्राकृतिक तौर पर बेहद ही लाभप्रद है जो आपके स्वास्थ्य को भी बनाए रखने में कारगर है।

पूरे विश्व में 22 सितम्बर को कार फ्री डे मनाया जाता है। प्रदूषण मुक्त वातावरण, ट्राफिक समस्या का समाधान, ईंधन बचत, समय बचत और आर्थिक बचत के साथ-साथ सबसे बड़ी बात स्वास्थ्यप्रद जीवन के लिए कार फ्री माहौल ही नहीं अपितु सायकल का उपयोग भी समय की मांग है। ग्लोबल वॉर्मिंग का समाधान निश्चित तौर पर सायक्लिंग ही है।

सायकल चलाने में अब लडक़पन नहीं किंतु बड़प्पन माना जाता है। सायकल सवार अब गरीब या मजबूर नहीं माने जाते किंतु देशप्रेमी, स्वास्थ्य प्रेमी और पर्यावरणप्रेमी माने जाते हैं।

देश के ताकतवर मंत्री हों या फिल्म के सुपरस्टार हों, प्रमुख उद्योगपति हो या विख्यात खिलाड़ी हो सभी सायकल चलाते हैं। पहले सिर्फ गरीब या मजबूर लोग ही सायकल चलाते हैं ऐसा भ्रम था वह भ्रम केन्द्रीय मंत्री मनसुख मांडविया जैसे सेलिब्रिटियों ने तोड़ दी है।

शिपिंग केन्द्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कार फ्री डे के अवसर पर एक वेब संवाद में कहा कि पहले देश में कहां इतनी सारी कार थी? बड़े वाहन थे? ऐसे में अधिकतर वर्ग सायकल ही चलाते थे। तब ऐसे ही कार फ्री डे मना लिया जाता था। अब लोकजीवन सुखी संपन्न हुआ अर्थात सायकल भूलती गई, किंतु यदि स्वास्थ्य सुख टिकाए रखना है तो सायकल बहुत जरुरी है।

बायसिकल इंडिया फाउन्डेशन के सीईओ भैरवी जोषी के साथ बात करते हुए केन्द्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने सायकलवीरों को प्रोत्साहित करते हुए आगे कहा कि अच्छी बात की पहल करते हैं तो प्रथम चरण में निंदा होती है, विरोध भी होती है और सही अर्थ में ध्येय के लिए टिके रहो तो अंत में स्वीकृति भी होती ही है। आज वे पिछले आठ वर्ष से संसद भवन में सायकल लेकर जाते हैं। इसके लिए उन्हें अनुसरण करनेवाले लोगों का वर्ग भी दिनों-दिन बढ़ता जाता है।

गुजरात में बड़े-बड़े शहरों में सायकल क्लब शुरु हुई है। लोगों में गजब का सायकल प्रेम जगा है। कोरोना काल में तो सायकल का विक्रय दुगना हो गया है। इसकी वजह है कि सायकल से शरीर का स्वास्थ्य बना रहता है, आर्थिक बचत होती है, प्रदूषण कम होता है, ट्राफिक को नियंत्रित किया जा सकता है। इन सभी बातों को देखते हुए सायकल यह आज की आवश्यकता है।

अंत में कार फ्री डे के अवसर पर आयोजित वेबिनार का निष्कर्ष यह रहा कि कार फ्री डे वर्ष में सिर्फ 22 सितम्बर को ही मनाने के बजाय हर महीने की 22 तारीख को मनाई जाए। ऐसा माहौल बनना चाहिए और इसके सामने सायकल को सौगुणा प्रोत्साहन मिलना चाहिए। यह पहल आगामी दिनों में मानवजीवन के लिए सुनहरा होगा और उसमें गुजरात पहल करेगी।

सायकल चलाने से पर्यावरण पर हम अहसान कर सक ते हैं। देश में आज कार व बड़े-बड़े वाहन चलाए जाते हैं जिसमें से प्रदूषण फैलने का डर है। दूसरी ओर सायकल यह प्राकृतिक तौर पर बेहद ही लाभप्रद है जो आपके स्वास्थ्य को भी बनाए रखने में कारगर है। पूरे विश्व में 22 सितम्बर को

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