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जानें ऐसा क्या हुआ कि खुश हैं कच्छ के ऊंट पालक

जानें ऐसा क्या हुआ कि खुश हैं कच्छ के ऊंट पालक

ऊंटनी के दूध ने तो कमाल कर दिया। कई भयंकर बीमारियों से लडऩे की क्षमता है इस दूध में।

राज्य में अब ऊंट का पालन करनेवाले मालधारियों को बहुत ही अधिक लाभ हो रहा है। इसकी वजह है कि ऊंटनी के दूध की मांग में भी वृद्घि होने से उन्हें दूध का अच्छा भाव मिल रहा है। भारत में पहली बार ऊंटनी के दूध का प्रोसेसिंग प्लान्ट कच्छ में स्थापित हुआ है। कच्छ में सरहद डेरी द्वारा प्रतिदिन 1000 लिटर दूध का कलेक्शन होता है।

ऊंटनी के दूध का प्लान्ट कच्छ में शुरु किए जाने से कच्छ में ऊंट का पालन करनेवाले लोगों में बहुत ही खुशी का माहौल दिख रहा है। इसकी वजह है कि ऊंटनी के दूध का प्रति लीटर 50 रुपए भाव मिल रहा है। कच्छ में कैमल मिल्क प्लान्ट में दूध की प्रोसेसिंग करने के बाद इस दूध का मार्केट में विक्रय किया जाता है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्ष 2012 में कच्छ में ऊंट की गणना की गई थी तब कच्छ में 7967 ऊंट दिखे थे किंतु वर्ष 2019 की ऊंट की गणना में उनकी संख्या में बहुत ही वृद्घि हुई है और कच्छ में पिछले 23 वर्ष में पहली बार ऊंटों की संख्या 9046 पर पहुंची है।

(PC: youtube.com)

पहले मालधारी लोग ऊंट बेचकर व्यवसाय करते थे किंतु अब कच्छ में ऊंटनी के दूध का प्रोसेसिंग प्लान्ट शुरु किए जाने से मालधारी अब ऊंट के पालन की तरफ बढ़े हैं। मालधारी ऊंटनी का दूध खुद भी पी रहे हैं और डेरी को भी दे रहे हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि डायबिटीस, ब्लडप्रेशर और कैंसर जैसी बीमारियों में ऊंटनी का दूध अचूक दवा के तौर पर उपयोगी है और इसके कारण ऊंटनी के दूध की मांग में वृद्घि हुई है।

कोरोना की महामारी के बीच कैमल मिल्क की मांग में बहुत ही वृद्घि हुई है। इसके कारण सरहद डेरी द्वारा अमूल डेरी के साथ मिलकर लाखोद के समीप 20 हजार लिटर दूध की क्षमतावाला प्लान्ट शुरु किया गया है। सरहद डेरी द्वारा नखत्राणा, भचाव और भुज समेत अन्य विस्तारों में से दैनिक 1000 लिटर जितना दूध एकत्रित की जाती है। सरहद डेरी द्वारा आगामी दिनों में ऊंटनी के दूध का चीज भी लॉन्च किया जाएगा।

मालधारियों द्वारा मीडिया के साथ बातचीत में जानकारी दी गई कि हमारे पूर्वज बहुत ही परेशान हैं और ऐसे समय पर ऊंटनी के दूध की कोई डिमान्ड नहीं थी। अभी भारत समेत विदेश में भी इस दूध की मांग है। इसमें से अलग-अलग वस्तुएं भी बनती हैं। विशेष तौर पर ऊंटनी का दूध दवा में अधिक पैमाने में उपयोग किया जाता है। हमें अभी सरहद डेरी के माध्यम से ऊंटनी के दूध का भाव 51 रुपए प्रति लिटर मिल रहा है। पहले हमें लोग ऊंटनी के दूध का 15 से 20 रुपए देते थे किंतु अब इसी दूध का 51 रुपया मिल रहा है।

ऊंटनी के दूध ने तो कमाल कर दिया। कई भयंकर बीमारियों से लडऩे की क्षमता है इस दूध में। राज्य में अब ऊंट का पालन करनेवाले मालधारियों को बहुत ही अधिक लाभ हो रहा है। इसकी वजह है कि ऊंटनी के दूध की मांग में भी वृद्घि होने से उन्हें दूध का अच्छा भाव मिल

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