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जोगी कांग्रेस की बगावत अब दिखेगी विधानसभा में, नेता भी बदलने की तैयारी

जोगी कांग्रेस की बगावत अब दिखेगी विधानसभा में, नेता भी बदलने की तैयारी

रायपुर. मरवाही विधानसभा चुनाव के दौरान जोगी कांग्रेस (छजकां) में फूटी बगावत अब कई और रंग बदलती नजर आएगी। 21 दिसंबर से शुरू होने वाले राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यह बगावत चरम रूप में सामने आ सकती है कि पार्टी के बागी विधायक अपने विधायक दल के नेता धर्मजीत सिंह की जगह नए नेता के चुनाव के लिए डिवीजन की मांग कर सकते हैं। यही नहीं, बागी गुट विधानसभा में छजकां के ही एक अलग गुट के रूप में मान्यता हासिल करने की कोशिश करेगा।

चार विधायकों वाली पार्टी छजकां में दो-दो विधायक दो गुटों में बंट गए हैं। अब तक पार्टी के विधायक दल के नेता के रूप में धर्मजीत सिंह मान्य रहे हैं, लेकिन विधानसभा का सत्र शुरू होने के बाद अगर बागियों के दांव सफल रहे, तो वे केवल दो विधायकों के दल के नेता रहेंगे। दूसरे गुट के बागी विधायक देवव्रत सिंह व प्रमोद शर्मा के अलग होने पर दूसरे धड़े के विधायक दल के नेता देवव्रत सिंह को बनाने की तैयारी हो चुकी है।

बागी गुट की ये है व्यूह रचना

बागी गुट के विधायक प्रमोद शर्मा ने हरिभूमि से चर्चा में कहा है कि 21 दिसंबर से शुरू होने जा रहे विधानसभा सत्र के दौरान उनकी मांग डिवीजन की होगी। यह गुट धर्मजीत सिंह को विधायक दल का नेता मानने से इनकार करते हुए अपने गुट का नया नेता चुनेगा। श्री शर्मा के अनुसार दूसरे धड़े में विधायक दल के नेता देवव्रत सिंह होंगे। यही नहीं, बागी गुट विधानसभा में एक अलग गुट के रूप में मान्यता हासिल करने का प्रयास करेगा। यानी दोनों बागी विधायक छजकां में ही बने रहेंगे। शर्मा की मानें, तो पार्टी विभाजन करने की तैयारी है। उनका ये दावा भी है कि उनका गुट ही असली छजकां होगा, पार्टी हमारे हाथ में आ जाएगी।

…और ये विकल्प हैं बागियों के पास

विधानसभा के नियम-कायदों के जानकारों के अनुसार दोनों विधायकों के खिलाफ उनकी पार्टी ने अब तक कानूनी रूप से कोई कदम नहीं उठाया है। अगर पार्टी कोई कानूनी कार्यवाही भी करती है, तो क्या विकल्प हो सकते हैं। अगर दोनों विधायकों को पार्टी निष्कासित कर देती है, तो भी वे स्वतंत्र विधायक के रूप में विधानसभा में काम करते रह सकते हैं, जैसा कि अमित जोगी को कांग्रेस से निष्कासित करने के बाद भी वे स्वतंत्र विधायक बने रहे। बागी अगर पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दें, तो सदन की सदस्यता से बाहर हो जाएंगे। यही कारण है कि दोनों विधायक इस्तीफे को तैयार नहीं हैं। पार्टी अगर विधानसभा में व्हिप जारी करे और विधायक उसकी उपेक्षा करें, तो भी उनका निष्कासन अनुशासन के आधार पर हो सकता है, लेकिन फिर ‌भी वे स्वतंत्र विधायक बने रह सकते हैं। एक और विकल्प ये भी है कि दोनों विधायक इस्तीफा देकर फिर चुनाव लड़कर विधानसभा में वापसी कर सकते हैं।

अभी प्रतिक्रिया व्यक्त करने की स्थिति नहीं

मैं ये एकदम नई बात सुन रही हूं, इस मामले में अभी कोई प्रतिक्रिया व्यक्त करने की स्थिति में नहीं हूं।

– डॉ.रेणु जोगी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, छजकां

मरवाही विधानसभा चुनाव के दौरान जोगी कांग्रेस (छजकां) में फूटी बगावत अब कई और रंग बदलती नजर आएगी। 21 दिसंबर से शुरू होने वाले राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यह बगावत चरम रूप में सामने आ सकती है कि पार्टी के बागी विधायक अपने विधायक दल के नेता धर्मजीत सिंह की जगह नए नेता के चुनाव के लिए डिवीजन की मांग कर सकते हैं। यही नहीं, बागी गुट विधानसभा में छजकां के ही एक अलग गुट के रूप में मान्यता हासिल करने की कोशिश करेगा।

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