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डिलीवरी करवाने का बेस्ट तरीका है कौन सा, इस पर पीजीआईएमएस के डाक्टर ने किया शोध

डिलीवरी करवाने का बेस्ट तरीका है कौन सा, इस पर पीजीआईएमएस के डाक्टर ने किया शोध

डॉ. दिप्ती दहिया।

हरिभूमि न्यूज: रोहतक

अक्सर देखने में आता है की गर्भवती महिला को डिलीवरी के समय नॉर्मल डिलीवरी (Normal delivery) करवाने की कोशिश चिकित्सकों द्वारा की जाती है लेकिन फिर भी नॉर्मल डिलीवरी ना हो पाने पर चिकित्सकों को सिजेरियन डिलीवरी करने पर मजबूर होना पड़ता है ऐसे में मां व बच्चे को ज्यादा परेशानी ना हो उसके लिए पीजीआईएमएस के चिकित्सकों ने बेहतरीन तरीके का चुनाव किया है।

उनकी इस रिसर्च को एक पेपर के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे बेस्ट पेपर के अवार्ड से नवाजा गया है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिति नंदा ने बताया कि उनके विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉक्टर दीप्ति दहिया (Deepti dahiya) ने रायपुर में आयोजित ओबस एंड गायनी सोसाइटी की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में 3 अक्टूबर को हिस्सा लिया था। डॉ. दीप्ति ने बताया कि डॉक्टर वाणी मल्होत्रा ने उन्हें इस कॉन्फ्रेंस में पेपर प्रस्तुत करने के लिए हौसला दिया।

डॉ. दीप्ति ने इस उपलब्धि का श्रेय विभागाध्यक्ष डॉक्टर समिति नंदा डॉक्टर, डॉ. सविता सिंगल, डॉ. पुष्पा दहिया, डॉक्टर अंजली गुप्ता, डॉ. निशा मलिक को दिया। कुलपति डॉ. ओपी कालरा, कुलसचिव डॉ. एच के अग्रवाल, निदेशक रोहतास यादव व विभागाध्यक्ष डॉ. समिति नंदा ने डॉ. दीप्ति दहिया को बधाई दी।

डॉ. दिप्ती ने 105 मरीजों पर की रिसर्च

डॉ. दीप्ति दहिया ने बताया की इस वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के सैकड़ों चिकित्सक शामिल हुए थे। कई चिकित्सकों ने अपने पेपर प्रस्तुत किए। डॉक्टर दीप्ति ने बताया कि उन्होंने भी इस कॉन्फ्रेंस में ‘रिलेशंस ऑफ मेथड ऑफ हेड डिलीवरी इन डीपीली इंपैक्टेड इन सेकंड स्टेज सिजेरियन टू मैटरनल फीटल आउटकम’ विषय पर पेपर प्रस्तुत किया।

उन्होंने बताया कि करीब 105 मरीजों की अपनी रिसर्च में उन्होंने पाया था कि जब चिकित्सक कई बार नॉर्मल डिलीवरी करवाने में असमर्थ हो जाता है तो सिजेरियन डिलीवरी ही अंतिम निर्णय रहता है, ऐसे में बच्चा नीचे की तरफ ऐसा होता है और बच्चे को सुरक्षित निकालने के लिए चिकित्सकों द्वारा आमतौर पर 3 तरीके अपनाए जाते हैं।

उन्होंने अपने रिसर्च में बताया कि इन 3 तरीकों में से सबसे बेहतरीन तरीका कौन सा है जिससे मां और शिशु को नुकसान ना पहुंचे और दोनों सुरक्षित रहें। डॉ. दीप्ति दहिया ने बताया कि उनके इस पेपर को कॉन्फ्रेंस में काफी सराहा गया और प्रथम स्थान देते हुए उन्हें डॉ. शोभा शर्मा गोल्ड मेडल अवार्ड से नवाजा गया।  

उनकी इस रिसर्च को एक पेपर के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे बेस्ट पेपर के अवार्ड (award) से नवाजा गया है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिति नंदा ने बताया कि उनके विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉक्टर दीप्ति दहिया ने रायपुर में आयोजित ओबस एंड गायनी सोसाइटी की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में 3 अक्टूबर को हिस्सा लिया था।

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