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डेढ़ साल बाद ईओडब्ल्यू के शिकंजे में आबकारी का पुराना खिलाड़ी

डेढ़ साल बाद ईओडब्ल्यू के शिकंजे में आबकारी का पुराना खिलाड़ी

रायपुर. शराब कारोबार में पांच हजार करोड़ रुपये का घोटाला करने के आरोप में फरार चल रहे आबकारी विभाग के पूर्व ओएसडी समुंद्र सिंह को आखिर ईओडब्ल्यू की टीम ने दबोच लिया। समुंद्र सिंह को उसके बोरियाकला निवास से पकड़ा गया। डेढ़ साल से फरार पूर्व ओएसडी पर दस हजार रुपये का ईनाम था। पकड़े जाने के बाद लिकर के कारोबार में किस तरह से हेराफेरी कर ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया, पूछताछ की जाएगी। गुरुवार को ईओडब्ल्यू की टीम ने समुंद्र सिंह के पकड़े जाने का खुलासा किया।

एसीबी व ईओडब्ल्यू चीफ आरिफ शेख ने पूर्व ओएसडी को उसके निवास से दबोचने की पुष्टि की। हालांकि अफसरों ने यह भी बताया, पूर्व ओएसडी की तबीयत खराब हो जाने पर उसे उपचार के लिए भर्ती कराया गया है। करीबी सूत्र के मुताबिक एसीबी और ईओडब्ल्यू की संयुक्त टीमें बनाकर समुंद्र सिंह की तलाश चल रही थी। खोजबीन के लिए पांच अलग-अलग टीमें बनाई गई थीं। खोजबीन के दौरान सूचना मिली कि समुंद्र सिंह रायपुर में अपने बोरियाकला स्थित मकान में छिपा हुआ है। तभी मौके पर दबिश देकर वहां से गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी की गई।

2019 में भगौड़ा घोषित करने की कवायद

पूर्व ओएसडी समुंद्र सिंह के ठिकानों पर 2019 में टीमों ने दबिश दी थी। इस दौरान समुंद्र सिंह का कुछ भी पता नहीं चला। लगातार खोजबीन करने के बाद दस हजार रुपये ईनाम की घोषणा कर वांटेड लिस्ट में पुलिस ने समुंद्र सिंह ने भगौड़ा बताया। अनुसंधान शाखा की टीम रायपुर, बिलासपुर और बोरियाकला में उसके आवास सहित 8 ठिकानों पर छापेमारी के बाद उसे दबोचने में असफल रही थी।

119 पन्नों के दस्तावेजों में तथ्यों की पड़ताल

आर्थिक अपराध शाखा के पास सौंपे गए दस्तावेजों में 119 पन्ने शामिल हैं। 22 फरवरी 2019 को शिकायत के बाद एसीबी और ईओडब्ल्यू के अफसरों ने तथ्यों को खंगालना शुरू किया। अब भौतिक सत्यापन के बाद ईओडब्ल्यू तगड़ा चार्जशीट तैयार करेगी। सौंपे गए दस्तोवेजों में लिकर पॉलिसी, शराब बिक्री, प्रॉफिट मार्जिन, शराब ठेकेदारों और निर्माताओं को लाभ, कर चोरी के संबंध में पूरे हिसाब-किताब का ब्योरा है।

सरकार बदलने के बाद इस्तीफा और गायब

पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के कार्यकाल में आबकारी विभाग में हजारों करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप है। जानकारी के मुताबिक सरकार बदलने के बाद कांग्रेस नेता नितिन भंसाली ने मुख्यमंत्री और ईओडब्ल्यू से शिकायत की थी। आरोप है, समुंद्र सिंह ने कमीशन की आड़ में हजारों करोड़ रुपये इधर से उधर किए। सरकारी नियंत्रण प्रभावशील होने के पहले ठेकेदारों की जेबें भरी। जब सरकार बदल गई, समुंद्र सिंह ने इस्तीफा दे दिया।

पूछताछ के लिए बाद में रिमांड

पूर्व ओएसडी आबकारी समुंद्र सिंह को अस्पताल में जांच के बाद जेल दाखिल करा दिया गया है। एसीबी के एक वरिष्ठ अफसर ने जानकारी दी है, तबीयत बिगड़ने की बात कहने पर निजी अस्पताल में जांच कराई गई। ठीक इसके बाद नियमानुसार कोविड टेस्ट कराकर समुंद्र सिंह को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। ईओडब्ल्यू द्वारा बताया गया है, पूछताछ के लिए अलग से रिमांड के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा।

 

हेल्थ जांच के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल दाखिल

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