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निजी अस्पतालों के नोडल अफसरों से दर्द किया जा रहा साझा, ज्यादा शुल्क, देर से डिस्चार्ज का रोना, होगी जांच

रायपुर. कलेक्टर द्वारा निजी अस्पतालों की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाने के साथ ही मरीजों का दर्द सामने आने लगा है। डेड बॉडी देने में देर करने, तय कीमत से अधिक राशि लेने, डिस्चार्ज में देर सहित कई तरह की शिकायतें मरीजों ने की है।

गौरतलब है कि सरकारी अस्पतालों के साथ ही जिले के 28 निजी अस्पतालों में भी कोविड सेंटर बनाए गए हैं, जहां कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है। इन 28 अस्पतालों में निगरानी के लिए 10 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। नियुक्त अधिकारियों के संपर्क नंबर भी शासन द्वारा जारी कर दिए गए हैं। किसी तरह की परेशानी होने पर मरीज इनसे संपर्क कर सकते हैं। कलेक्टर द्वारा एक अक्टूबर को यह व्यवस्था की गई थी।

आदेश जारी होने के कुछ दिनों के भीतर ही मरीजों द्वारा संबंधित अधिकारियों को फोन कर अपना दर्द साझा किया जा रहा है। नोडल अधिकारी एके पांडेय ने बताया, सबसे ज्यादा फोन फीस को लेकर आ रहे हैं। कई मरीजों ने शिकायत की है कि उनसे अधिक पैसे लिए जा रहे हैं। छोटे अस्पतालों की अपेक्षा बड़े निजी अस्पतालों के संदर्भ में शिकायतें अधिक आ रही हैं।

पूछताछ के लिए भी कॉल

नोडल अधिकारी प्रशांत शर्मा के अनुसार शिकायतों के साथ ही पूछताछ के लिए भी फोन आ रहे हैं। किन अस्पतालों में इलाज के लिए संपर्क किया जा सकता है, निर्धारित फीस सहित अन्य चीजों के बारे में लोग जानना चाह रहे हैं। डॉ. डीके नेताम ने बताया, ज्यादा पैसे लेने की शिकायतें आ रही हैं। साथ ही होम क्वारेंटाइन के संदर्भ में भी जानकारी मांग रहे हैं। तीन बड़े अस्पतालों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त की गईं प्राची मिश्रा ने बताया, कुछ लोगों ने अधिक चार्ज लेने की शिकायत की है। उनसे बिल व अन्य जानकारियां मांगी गई हैं। एक अस्पताल की शिकायत प्राप्त हुई थी कि डेड बॉडी देने में विलंब किया जा रहा है। हालांकि बाद में आरटीबीसी टेस्ट के बाद बॉडी परिजनों को सौंप दी गई।

स्वत: जाएंगे जांच के लिए

एक अन्य नोडल अधिकारी लोकनाथ साहू के अनुसार अब तक विशेष शिकायत उनके पास नहीं आई है। वीके देवांगन ने बताया कि उन्होंने स्वयं अस्पताल में संपर्क किया था। ऐसे में स्वत: अस्पताल जाकर मरीजों से बात कर संपर्क नंबर उपलब्ध कराएंगे, ताकि उन्हें परेशानी न हो। जिन अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं, उनकी जांच की जाएगी। आरोप सिद्ध होने पर सख्त कार्रवाई भी होगी।

कलेक्टर द्वारा निजी अस्पतालों की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाने के साथ ही मरीजों का दर्द सामने आने लगा है। डेड बॉडी देने में देर करने, तय कीमत से अधिक राशि लेने, डिस्चार्ज में देर सहित कई तरह की शिकायतें मरीजों ने की है।

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