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प्रेग्नेंसी में न करें इग्नोर डाइजेस्टिव प्रॉब्लम्स

प्रेग्नेंसी में न करें इग्नोर डाइजेस्टिव प्रॉब्लम्स (फाइल फोटो)प्रेग्नेंसी में न करें इग्नोर डाइजेस्टिव प्रॉब्लम्स (फाइल फोटो)

गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर में हार्मोन में चेंज के कारण कई बदलावों के साथ-साथ पाचन संबंधी समस्याएं भी हो जाती हैं। कुछ डाइजेस्टिव डिसऑर्डर तो लगभग सभी महिलाओं में होते हैं। लेकिन जिन महिलाओं में क्रोनिक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिसऑर्डर होते हैं, उन्हें अपना खास ध्यान रखने की जरूरत होती है।

हायपर एमेसिसस ग्रेविडरम 

वॉमिटिंग, जी मिचलाना प्रेग्नेंसी की सबसे आम समस्या है, जो 90 फीसदी महिलाओं में देखी जाती है। ऐसा प्रेग्नेंट महिलाओं में एचसीजी नामक कंपोनेंट के कारण होता है। यह प्रेग्नेंसी के 12 से 13 हफ्तों तक बढ़ता रहता है। लेकिन बाद में खुद ही स्टेबलाइज हो जाता है। फिर वॉमिटिंग की दिक्कत भी दूर हो जाती है। जब जी मिचलाने, वॉमिटिंग की समस्याएं होती हैं, तब इन्हें मैनेज करने के लिए थोड़ा-थोड़ा भोजन दिन में कई बार करना चाहिए, लो फैट, कम मसाले और ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले फूड का सेवन करें। आमतौर पर इससे आराम मिल जाता है। लेकिन वॉमिटिंग, जी मिचलाने की समस्या जब गंभीर स्तर पर पहुंच जाती है तो इसे हायपर एमेसिसस ग्रेविडरम कहते हैं। यह समस्या बहुत कम महिलाओं में होती है, यह हार्मोन के असंतुलन और मनोवैज्ञानिक कारणों से होती है। इससे इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है, जिसके लिए गर्भवती महिला को कभी-कभी अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है।

गैस्ट्रोइसोफीगल रिफ्लक्स डिजीज

सीने में जलन की समस्या 45 से 80 फीसदी प्रेग्नेंट महिलाओं में होती है। ऐसा पेट बढ़ने और खाद्य नली और पेट के बीच एंगुलेशन यानी सही कोण की कमी से होता है। इस समस्या का इलाज लाइफस्टाइल में बदलाव करने से संभव हो जाता है। इसके तहत थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन और सोने से कम से कम 3 घंटे पहले डिनर करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा दवाएं भी दी जाती हैं।

गैस प्रॉब्लम

गर्भावस्था में महिलाओं के पेट में गैस ज्यादा बनना भी कॉमन प्रॉब्लम है। कुछ खास फूड्स की वजह से भी गैस बनती है। इसलिए प्रेग्नेंसी में पत्तागोभी, फूलगोभी, बींस, अंकुरित अनाज, तले हुए भोजन का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है। साथ ही एक्सरसाइज करना भी जरूरी है।

कब्ज-डायरिया 

प्रेग्नेंसी में 10-40 फीसदी महिलाओं में कब्ज की शिकायत हो जाती है। पेट में मूवमेंट कम हो जाने, आयरन सप्लीमेंट लेने और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन के कारण यह समस्या हो सकती है। साथ ही युट्रस का आकार बढ़ना भी इसकी एक वजह होती है। ऐसे में रेशेदार भोजन लेने, तला-भुना, प्रोसेस्ड फूड न लेना और ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जाती है। साथ ही एक्सरसाइज करना भी जरूरी होता है।

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गर्भवती महिलाओं में इंफेक्शन की वजह से डायरिया की शिकायत भी हो जाती है। फूड प्वायजनिंग की वजह से भी ऐसा हो सकता है। ऐसे में चिकित्सक की सलाह से कुछ दवाएं, प्रॉपर हाइड्रेशन की सलाह दी जाती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान पाचन संबंधी कुछ समस्याएं अधिकतर महिलाओं को होती हैं। लेकिन इन समस्याओं का ज्यादा बढ़ना सीरियस इश्यू हो सकता है। इन्हें नजरअंदाज करना ठीक नहीं। इसके लिए डॉक्टर की सलाह लेकर पाचन संबंधी समस्या का निदान करना जरूरी है।

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