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बंगाल में चुनाव के पहले लगेगा राष्ट्रपति शासन!

कोलकाता, बिच्छू डॉट कॉम। पश्चिम बंगाल में अगले साल होने जा रहे चुनाव से पहले राष्ट्रपति शासन की खबरें आने लगी हैं। इन खबरों को खुद राज्यपाल ओपी धनखड़ ने बल दिया है। उन्होंने कहा कि बंगाल ऐसा राज्य है जहां सबसे अधिक मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। कोलकाता व बंगाल पुलिस विपक्ष के लोगों के मानवाधिकारों का सबसे अधिक हनन करती है। राज्यपाल ने चेतावनी दी कि वह राज्य में मानवाधिकार का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी हालातों की समीक्षा करेंगे और रिपोर्ट लेंगे। अगर सरकार इसमें फेल दिखी तो कमान उन्हें संभालनी पड़ेगी। राज्यपाल के इस बयान के बाद राज्य में एक बार फिर राष्ट्रपति शासन की सरगर्मी बढ़ती दिखी है। अगले साल की शुरुआत में बंगाल में चुनाव होने हैं। भाजपा यही चाहेगी कि यह चुनाव राष्ट्रपति शासन के दौरान हों। कहा जा रहा है कि भाजपा 2021 में होने वाले पश्चिम बंगाल चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। दुर्गा पूजा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह का दौरा कई मायने रखता है। पार्टी हिंदुत्व की विचारधारा को पैनी धार दे सकती है।
भाजपा के हौसले बुलंद
पिछले लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के बाद भाजपा के हौसले बुलंद है। चुनाव में भाजपा ने ममता के गढ़ में बढ़ी सेंध लगाते हुए 18 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। बंगाल में इस प्रचंड जीत के बाद एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या 2021 में बंगाल में भाजपा अपनी सरकार बना सकती है? सवाल ये भी उठा खड़ा हुआ है कि क्या बंगाल में जिस तरह ममता ने लेफ्ट में गढ़ में सेंध लागते हुए 2011 के विधानसभा चुनाव में 184 सीटों पर जीत हासिल की थी वैसा ही कुछ 2021 में भाजपा करने जा रही है? 2011 के विधानसभा चुनाव में जिसमें ममता ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर लेफ्ट के किले को ढहा दिया था उससे ठीक दो साल पहले टीएमसी ने 2009 के आम चुनाव में बड़ी जीत हासिल करते हुए अपने सांसदों की संख्या एक से बढ़ाकर 19 कर दी थी और ऐसा ही कुछ इस बार बीजेपी ने किया है जिसने 2014 के मुकाबले अपने सांसदों की संख्या 2 से बढ़ाकर 18 कर दी है।
भाजपा के राष्ट्रवाद और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति ने बंगाल में भाजपा को इतनी बेहतर स्थिति में ला दिया। ममता की हिंदू विरोधी नीति और मोदी की राष्ट्रवादी विचारधारा के कैंपेन में ममता के वोटरों को भी भाजपा की तरफ मोड़ दिया।
वोट शेयर में बराबरी की टक्कर
पश्चिम बंगाल की कुल 42 लोकसभा सीटों में से ममता बनर्जी के पार्टी ने 22 सीटों पर और भाजपा ने 18 सीटों पर जीत हासिल की है। अगर दोनों ही पार्टियों के मिले वोट शेयर को देखे तो टीएमसी को जहां 43.3 प्रतिशत वोट मिले तो बीजेपी ने अपने वोट फीसदी में पिछले चुनाव के मुकाबले लगभग 23 फीसदी का इजाफा करते हुए 40.3 प्रतिशत वोटों पर कब्जा किया। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मात्र 17 फीसदी मत मिले थे।
बंगाल में बीजेपी का भविष्य
2014 के आम चुनाव में बंगाल में मात्र 2 सीटें जीतने वाली भाजपा ने इस बार 18 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की है। अगर लोकसभा चुनाव के नतीजों का विधानसभा सीट वार विश्लेषण करें तो विधानसभा की कुल 294 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने लगभग 130 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाई है। वहीं सत्तारूढ दल टीएमसी मात्र 158 सीटों पर बढ़त मिली है। ऐसे में जब दो साल बाद 2021 में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव है तो वहां बीजेपी और टीएमसी के बीच कांटे का मुकाबला देखने को मिलना तय माना जा रहा है।

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