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बंद हो चुके स्कूलों में भी छात्रों को दे दिया प्रवेश, आरटीई की सीटों के लिए अब दोबारा लॉटरी

बंद हो चुके स्कूलों में भी छात्रों को दे दिया प्रवेश, आरटीई की सीटों के लिए अब दोबारा लॉटरी

रायपुर. शिक्षा केे अधिकार के अंतर्गत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में दिए जाने वाले प्रवेश में इस बार कई तरह के पेंच फंस गए हैं। लॉकडाउन के कारण आरटीई की प्रक्रिया इस वर्ष देर से शुरू हुई है। पहले चरण की लॉटरी में छात्रों को ऐसे स्कूलों में सीटें आवंटित कर दी गई हैं, जो बंद हो चुकी हैं। असमंजस में फंसे हुए इन बच्चों के पालक अब जिला शिक्षा कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।

बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आने के बाद लाेक शिक्षण संचालनालय ने इस संदर्भ में आदेश जारी किया है। जिन छात्रों को बंद हो चुके स्कूलों में प्रवेश दे दिया गया है, उनके लिए लॉटरी फिर से निकाली जाएगी और वर्तमान में संचालित स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को डीपीआई ने पत्र जारी कर दिया है। गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के बाद छोटे निजी स्कूलों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। प्रदेश के लगभग 100 निजी स्कूल मौजूदा शैक्षणिक सत्र में बंद हो गए हैं। इनमें से 13 स्कूल राजधानी के हैं।

तारीख नहीं, लेकिन शीघ्रता के निर्देश

आरटीई की पहली लॉटरी जुलाई में निकाली गई थी। तीन माह से अधिक वक्त गुजर जाने के बाद भी अब तक दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। बची हुई सीटों के लिए आवेदन मंगाए गए, परंतु सीट आवंटन के लिए नोटिफिकेशन ही जारी नहीं किया जा सका। इसमें हो रही लेटलतीफी पर भी लोक शिक्षण संचालनालय ने नाराजगी जाहिर की है। कोई डेडलाइन इसके लिए नहीं दी गई है, लेकिन सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को शीघ्र से शीघ्र रिक्त सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण करने कहा गया है।

पालकों से किया जाएगा संपर्क

नोडल अधिकारियों को पालकों से संपर्क करने कहा गया है। ऐसे पालक, जिनके बच्चों को बंद हो चुके स्कूलों में एडमिशन मिला है, उनके आवेदन लिए जाएंगे। इसके अलावा ऐसे छात्र, जिनका नाम लॉटरी में आ चुका है, फिर भी उन्होंने स्कूलों में प्रवेश नहीं लिया है, उनसे भी संपर्क किया जाएगा। प्रवेश नहीं लेने के उनके कारणों की पड़ताल कर समस्याओं को दूर किया जाएगा। प्रदेश में आरटीई की 81 हजार 452 सीटें हैं। इनके लिए 84 हजार 665 आवेदन विभाग को मिले हैं। पहले चरण के आवंटन के पश्चात 35 हजार सीटें प्रदेश में खाली हैं।

शिक्षा केे अधिकार के अंतर्गत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में दिए जाने वाले प्रवेश में इस बार कई तरह के पेंच फंस गए हैं। लॉकडाउन के कारण आरटीई की प्रक्रिया इस वर्ष देर से शुरू हुई है। पहले चरण की लॉटरी में छात्रों को ऐसे स्कूलों में सीटें आवंटित कर दी गई हैं, जो बंद हो चुकी हैं। असमंजस में फंसे हुए इन बच्चों के पालक अब जिला शिक्षा कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।

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