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भाई दूज पर भाई की लंबी उम्र के लिए बहना करेंगी तिलक, जानिए शुभ मुहुर्तभाई दूज पर भाई की लंबी उम्र के लिए बहना करेंगी तिलक, जानिए शुभ मुहुर्त

इटारसी। उल्लास के पर्व दीपावली (Deepawali) के तीसरे दिन भाई-बहन के प्यार के प्रतीक भाईदूज (Bhaidooj) मनाया जाएगा। 16 नवंबर को पड़ने वाले भाई दूज के साथ ही दीपोत्सव (Depotsav) का समापन हो जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को अपने घर भोजन के लिए बुलाती है और उन्हें प्यार से खाना खिलाती हैं। आचार्य विकास दुबे ने बताया कि भाईदूज का पर्व कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। भाई दूज (Bhaidooj) का टीका शुभ मुर्हूत दिन 12:43 से 02:16 तक है। वहीं व्यापार मुहुर्त सुबह 10.08 से 10.18 तक रहेगा।

रक्षाबंधन की तरह से त्योहार भी भाई-बहन के लिए बेहद खास होता है। भाईदूज पर बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाती है और सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना करती हैं। इस दिन यमुना में डुबकी लगाने की परंपरा है। यमुना में स्नान करने का बड़ा ही महत्व इस दिन बताया गया है। 16 को भगवान चित्रगुप्त और कलाम-दवात की पूजा इसी दिन पूरे जगत का लेखाजोखा रखने वाले भगवान चित्रगुप्त की जयंती भी मनाई जाती है। चित्रगुप्त पूजा के दौरान कलम दवात की पूजा होगी।

भाई दूज का इतिहास और महत्व
ऐसा माना जाता है कि इस खास दिन पर हिंदू धर्म में मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने आए. यमुना ने कई बार यमराज को बुलाया था लेकिन वह उन्हें दर्शन देने में असमर्थ थे। हालांकि, एक बार जब यमराज ने यमुना का दौरा किया। तो उनका बहुत प्यार और सम्मान के साथ स्वागत किया गया। यमुना ने अपने माथे पर तिलक भी लगाया, इतना प्यार पाने के बाद यमराज ने यमुना से वरदान मांगने को कहा, उसकी बहन ने यमराज को हर साल एक दिन चिह्नित करने के लिए कहा जहां वह उसे देखने जाएंगे। इस प्रकार, हम भाई दूज को भाई और बहन के बीच के बंधन को मनाने के लिए मनाते हैं।

 

इटारसी। उल्लास के पर्व दीपावली (Deepawali) के तीसरे दिन भाई-बहन के प्यार के प्रतीक भाईदूज (Bhaidooj) मनाया जाएगा। 16 नवंबर को पड़ने वाले भाई दूज के साथ ही दीपोत्सव (Depotsav) का समापन हो जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को अपने घर भोजन के लिए बुलाती है और उन्हें प्यार से खाना खिलाती हैं। आचार्य विकास दुबे ने बताया कि भाईदूज का पर्व कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। भाई दूज (Bhaidooj) का टीका शुभ मुर्हूत दिन 12:43 से 02:16 तक है। वहीं व्यापार मुहुर्त सुबह 10.08 से 10.18 तक रहेगा।

रक्षाबंधन की तरह से त्योहार भी भाई-बहन के लिए बेहद खास होता है। भाईदूज पर बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाती है और सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना करती हैं। इस दिन यमुना में डुबकी लगाने की परंपरा है। यमुना में स्नान करने का बड़ा ही महत्व इस दिन बताया गया है। 16 को भगवान चित्रगुप्त और कलाम-दवात की पूजा इसी दिन पूरे जगत का लेखाजोखा रखने वाले भगवान चित्रगुप्त की जयंती भी मनाई जाती है। चित्रगुप्त पूजा के दौरान कलम दवात की पूजा होगी।

भाई दूज का इतिहास और महत्व
ऐसा माना जाता है कि इस खास दिन पर हिंदू धर्म में मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने आए. यमुना ने कई बार यमराज को बुलाया था लेकिन वह उन्हें दर्शन देने में असमर्थ थे। हालांकि, एक बार जब यमराज ने यमुना का दौरा किया। तो उनका बहुत प्यार और सम्मान के साथ स्वागत किया गया। यमुना ने अपने माथे पर तिलक भी लगाया, इतना प्यार पाने के बाद यमराज ने यमुना से वरदान मांगने को कहा, उसकी बहन ने यमराज को हर साल एक दिन चिह्नित करने के लिए कहा जहां वह उसे देखने जाएंगे। इस प्रकार, हम भाई दूज को भाई और बहन के बीच के बंधन को मनाने के लिए मनाते हैं।

 

इटारसी। उल्लास के पर्व दीपावली (Deepawali) के तीसरे दिन भाई-बहन के प्यार के प्रतीक भाईदूज (Bhaidooj) मनाया जाएगा। 16 नवंबर को पड़ने वाले भाई दूज के साथ ही दीपोत्सव (Depotsav) का समापन हो जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को अपने घर भोजन के लिए बुलाती है और उन्हें प्यार से खाना खिलाती हैं।

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