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मदवि के 118 करोड़ रुपये निगल गया कोरोना

मदवि के 118 करोड़ रुपये निगल गया कोरोना

अमरजीत एस गिल: रोहतक

कोविड-19 ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय की आर्थिक रीढ़ तोड़कर रख दी है। जिसकी वजह यूनिवर्सिटी (University) बड़े आर्थिक संकट से गुजर रही है। अब हालात एेसे हो चुके हैैं कि कर्मचारियों को सितम्बर का वेतन देने के लिए भी विश्वविद्यालय के पास बजट नहीं है। अगर यूनिवर्सिटी को कोरोना पूर्व की स्थिति में नहीं लाया गया तो पैसे को लेकर परिस्थितियां और विकट होंगी।

ऐसा ही हो सकता है कि कर्मचारियों के वेतन में विश्वविद्यालय को कटौती भी करनी पड़ जाए। ऐसे में कर्मचारियों (employees) के सामने फिर बड़ी दिक्कतें होंगी। अब सिर्फ एक ही विकल्प शेष है कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ विश्वविद्यालय को महामारी से पहले की स्थिति में लाया जाए। सभी प्रकार के शैक्षणिक कार्य पहले की तरह ही शुरू करवाए जाएं। क्योंकि जब तक कोरोना का भय छात्रों और दूसरे समुदाय के भीतर रहेगा। तब तक हालात सामान्य नहीं होंगे।वेतन पर हर माह 12 करोड़ का खर्च 

विश्वविद्यालय के नियमित गैर शिक्षक कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन पर हर महीने 12 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। इसके अलावा जो कर्मचारी ठेके पर काम करते हैं,उनका वेतन अलग है। बताया जा रहा है कि हर महीने करीब 18- 20 करोड़ रुपए विश्वविद्यालय को खर्च करना पड़ता है। लेकिन इस वैश्विक महामारी ने यूनिवर्सिटी का आर्थिक गणित बिगाड़कर रख दिया है।

सरकार से नहीं मिला बजट

राज्य सरकार विश्वविद्यालय को हर साल 103 करोड़ रुपए का बजट प्रदान करती है। यह बजट यूनिवर्सिटी को किश्तों में प्राप्त होता है। अमूमन हर साल मई-जून तक लगभग 50 करोड़ रुपए राज्य सरकार की तरफ से विश्वविद्यालय को प्राप्त हो जाते थे।

लेकिन इस बार यह पैसा अभी नहीं मिला है। जिसकी वजह से यूनिवर्सिटी की आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो चुकी है। इसका सहज ही अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि कर्मचारियों को वेतन देने के लिए विश्वविद्यालय के पास पैसा ही नहीं है। और कर्मचारी आंदोलन की राह पकड़ रहे हैं।

बीते साल 133 करोड़ की हुई थी आमदनी

वित्तीय वर्ष 2019-20 में विश्वविद्यालय को अक्टूबर तक 133 करोड़ रुपए की आमदनी शैक्षणिक गतिविधियों से हो चुकी थी। दूरस्थ शिक्षा निदेशालय एक साल में विश्वविद्यालय को 45 करोड़ रुपए कमाकर देता है।

इसी प्रकार हॉस्टलों से यूनिवर्सिटी को प्रत्एक साल अढ़ाई करोड़ रुपए की आमदन होती है। 16 करोड़ रुपए एमडीयू को संबंधित कॉलेज विभिन्न फंडों के रूप में देते हैं। इसी प्रकार 70 करोड़ रुपए परीक्षाएं आयोजित करवाने पर विश्वविद्यालय को प्राप्त होते हैं। लेकिन इस बार अभी तक मात्र 15 करोड़ की इनकम यूनिवर्सिटी को परीक्षाओं से हुई है। कुल मिलाकर118 करोड़ रुपए का सीधा-सीधा घाटा कोरोना ने विवि को कर दिया है।

सरकार से बजट मांगा

महामारी का असर विश्वविद्यालय की आर्थिक स्िथति पर पड़ा है। विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को सितम्बर का वेतन देने के लिए सरकार से बजट मांगा गया है। जब सरकार बजट उपलब्ध करवा देगी। तब कर्मियों को वेतन दे दिया जाएगा। -प्रो. गुलशन लाल तनेजा, कुल सचिव, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक 

ऐसा ही हो सकता है कि कर्मचारियों के वेतन (salery) में विश्वविद्यालय को कटौती भी करनी पड़ जाए। ऐसे में कर्मचारियों के सामने फिर बड़ी दिक्कतें (Problems) होंगी। अब सिर्फ एक ही विकल्प शेष है कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ विश्वविद्यालय को महामारी से पहले की स्थिति में लाया जाए।

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