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यहां गोवर्धन पूजा पर मनाते है अनूठी परंपरा, बच्चों को लिटाते है गोबर परयहां गोवर्धन पूजा पर मनाते है अनूठी परंपरा, बच्चों को लिटाते है गोबर पर

बैतूल। हमारे देश में तरह तरह की परंपराए होती है। और इन परंपराओं के नाम पर आज भी देश में कई तरह की अनूठी चीजे होती है। हर त्यौहार के बाद ऐसी कोई न कोई परंपरा मनाई जाती है जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकती है। ऐसी ही एक परंपरा दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा के दिन मध्यप्रदेश के बैतूल में मनाई जाती है। इस परंपरा में गोबर से बने गोवर्धन पर छोटे.छोटे बच्चों को लिटाया जाता है।

यह है अनूठी परंपरा
गोबर (Gowar) के ढेर पर बच्चों को लिटाने की परंपरा गोवर्धन पूजा (Govardhan Pooja) के दिन बैतूल जिले में एक बच्चों को गोबर के ढेर पर लिटाने की परंपरा है। माता-पिता ही अपने मासूम बच्चों को गोबर से बने गोवर्धन पर लिटाते हैं। रोते-बिलखते बच्चों को देखकर भी माता-पिता का दिल नहीं पसीजता। लोग बताते हैं कि ऐसा करने से बच्चे तंदरुस्त रहते हैं। मान्यता है कि बच्चों को गोबर पर लिटाकर गोवर्धन भगवान से अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। ऐसा आयोजन बैतूल जिले में कई जगहों पर होता है। स्थानीय लोग कहते हैं कि हमलोग ऐसा आजमा चुके हैं। वहीं जानकार कहते हैं कि यह सिर्फ आस्था का विषय है।

बैतूल। हमारे देश में तरह तरह की परंपराए होती है। और इन परंपराओं के नाम पर आज भी देश में कई तरह की अनूठी चीजे होती है। हर त्यौहार के बाद ऐसी कोई न कोई परंपरा मनाई जाती है जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकती है। ऐसी ही एक परंपरा दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा के दिन मध्यप्रदेश के बैतूल में मनाई जाती है। इस परंपरा में गोबर से बने गोवर्धन पर छोटे.छोटे बच्चों को लिटाया जाता है।

यह है अनूठी परंपरा
गोबर (Gowar) के ढेर पर बच्चों को लिटाने की परंपरा गोवर्धन पूजा (Govardhan Pooja) के दिन बैतूल जिले में एक बच्चों को गोबर के ढेर पर लिटाने की परंपरा है। माता-पिता ही अपने मासूम बच्चों को गोबर से बने गोवर्धन पर लिटाते हैं। रोते-बिलखते बच्चों को देखकर भी माता-पिता का दिल नहीं पसीजता। लोग बताते हैं कि ऐसा करने से बच्चे तंदरुस्त रहते हैं। मान्यता है कि बच्चों को गोबर पर लिटाकर गोवर्धन भगवान से अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। ऐसा आयोजन बैतूल जिले में कई जगहों पर होता है। स्थानीय लोग कहते हैं कि हमलोग ऐसा आजमा चुके हैं। वहीं जानकार कहते हैं कि यह सिर्फ आस्था का विषय है।

बैतूल। हमारे देश में तरह तरह की परंपराए होती है। और इन परंपराओं के नाम पर आज भी देश में कई तरह की अनूठी चीजे होती है। हर त्यौहार के बाद ऐसी कोई न कोई परंपरा मनाई जाती है जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकती है। ऐसी ही एक परंपरा दीपावली के

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