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रेलवे ट्रैक पर नहीं सोने के कारण बच गई चार श्रमिकों की जान

रेलवे ट्रैक पर नहीं सोने के कारण बच गई चार श्रमिकों की जान

जबलपुर। महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आकर जान गंवाने वाले 16 श्रमिकों के साथ चार ऐसे श्रमिक भी हैं, जिनकी किस्मत साथ दे गई और वे ट्रैक पर नहीं सोए, जिसकी वजह से उनकी जान बच गई।

शुक्रवार सुबह औरंगाबाद जिले में इस हादसे में घायल हुए श्रमिक सज्जन सिंह ने आज यहां मीडिया के समक्ष हादसे के बारे में बताया। दरअसल ये 20 श्रमिक जालना की एक सरिया फैक्ट्री में कार्य करते थे और ये लॉकडाउन के चलते मध्यप्रदेश के शहडोल, उमरिया और मंडला जिला वापस लौटने के लिए गुरुवार की रात रेलवे ट्रैैक पर पैदल चलकर लगभग चालीस किलोमीटर आ गए थे।

दुर्घटना में जान गंवाने वाले सोलह श्रमिकों के शव और घायल श्रमिक आज यहां विशेष ट्रेन से पहुंचे। स्टेशन पर मीडिया से चर्चा में सज्जन सिंह ने हादसे के बारे में बताया। वहीं इसी ट्रेन से श्रमिकों के शव उमरिया और शहडोल जिले भेजे गए।

सज्जन सिंह ने बताया कि चालीस किलोमीटर चलने केे बाद वे औरंगाबाद पहुंचने के काफी करीब करमाड़ आ गए थे। लेकिन सुबह के चार बज गए और सभी को भूख लग रही थी। इसलिए वे खाना खाने के बाद रेलवे ट्रैक पर ही सो गए। सोलह जन ट्रैक पर सोए थे, जबकि शेष चार ट्रैक किनारे सोए हुए थे, इसलिए वे ट्रेन की जद में आने से बच गए।

सज्जन ने बताया कि सुबह लगभग साढ़े पांच बजे एक मालगाड़ी रुकी थी। जब वह आगे बढ़ी तो, देखा कि ट्रैक पर शव पड़े हुए थे। उनके साथी जान गंवा चुके थे। यह नजारा देख वह बेहोश हो गया था। सज्जन ने बताया कि इसके बाद उसने स्वयं काे अस्पताल में पाया।

मध्यप्रदेश के मंडला जिला निवासी सज्जन सिंह ने बताया कि जालना से वापस आने के लिए वह सभी पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से प्रयासरत थे। इस दौरान गांव के सरपंच से भी बात हुई। प्रशासन से भी संपर्क का प्रयास किया गया। लेकिन सफलता नहीं मिली। तब उन्होंने औरंगाबाद तक पैदल आने का सोचा और वहां से किसी साधन जैसे वाहन आदि की मदद से सभी की अपने घरों को लौटने की योजना थी।

सज्जन सिंह ने कहा कि उनके पास घर लौटने के लिए पैसे तो थे, लेकिन वापस लौटने के लिए वाहन या किसी साधन की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। इसलिए जालना से औरंगाबाद तक उन्होंने पैदल आने का तय किया और रात भर में लगभग 40 किलोमीटर आ चुके थे। उनके साथ भतीजे सुमित ने भी कहा कि यदि किसी वाहन आदि की व्यवस्था हो जाती तो वे पैदल नहीं आते।

कल के इस हादसे में उमरिया जिले के पांच और शहडोल जिले के 11 श्रमिकों की मौत हुई है। जो बच गए हैं, वे इसी इलाके के मंडला जिला निवासी हैं। हादसे के बाद मध्यप्रदेश सरकार कल सक्रिय हुई और विशेष ट्रेन से सभी के शव आज दिन में जबलपुर लाए गए। यहां से प्रशासन ने शवों को सभी के गृह गांव भेजने की व्यवस्था की।

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जबलपुर। महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आकर जान गंवाने वाले 16 श्रमिकों के साथ चार ऐसे श्रमिक भी हैं, जिनकी किस्मत साथ दे गई और वे ट्रैक पर नहीं सोए, जिसकी वजह से उनकी जान बच गई। शुक्रवार सुबह औरंगाबाद जिले में इस हादसे में घायल हुए श्रमिक
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