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लॉकडाउन के 134 दिनों में दुनिया के चर्चित विश्वविद्यालयों से हासिल किए 160 सर्टिफिकेट

लॉकडाउन के 134 दिनों में दुनिया के चर्चित विश्वविद्यालयों से हासिल किए 160 सर्टिफिकेट

विकास चौबे. बिलासपुर. कोरोना के कारण जब लाॅकडाउन लगा था। घर से बाहर निकलने पर पाबंदी थी। चारों तरफ त्राहिमाम मचा था। स्कूल-कालेज, कामकाज सब बंद। लोग डिप्रेशन में थे। हजारों की काउंसलिंग करनी पड़ी। ऐसे में बिलासपुर के छात्र प्रतीक गायकवाड़ ने ऐसा कारनामा कर दिखाया जो न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि, देश-दुनिया को यह सिखा सकता है कि जब नकारात्मक भाव हावी हों, तब उसे अवसर में कैसे बदलें।

बिलासपुर के छात्र प्रतीक गायकवाड़ ने इसका पढ़ाई में सदुपयोग किया। प्रतीक ने 134 दिनों में करीब 200 यूनिवर्सिटी से ऑनलाइन परीक्षा देकर प्रमाण पत्र हासिल किए। सबसे कम समय में प्रोफेशनल सर्टिफिकेट हासिल करने के मामले में उनका नाम इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है। कम समय में इतनी यूनिवर्सिटी से कोर्स करने के बाद अब प्रतीक को देश के साथ ही विदेशी विवि से कोर्स करने के साथ ही जाब के लिए भी आफर आ रहे हैं। प्रतीक फिलहाल चार कंपनियों में जाब कर भी रहे हैं।

ऑक्सफोर्ड, हांगकांग, स्टेनफोड जैसी यूनिवर्सिटी

ऑक्सफोर्ड, जॉन हॉकिंस, हॉंगकांग जैसे यूनिवर्सिटी से ऑनलाइन कोर्स और परीक्षा देने की योजना बनाई। इसके लिए बीआईटी दुर्ग के प्रोफसरों से संपर्क करते हुए मार्गदर्शन लिया। बीआईटी ने स्पांसर किया। उन्होंने विदेशी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई और परीक्षा के लिए एप्लाई किया। सभी यूनिवर्सिटी में एडमिशन भी मिल गया। प्रतीक के मुताबिक सभी कोर्स और इंटरशिप उनके लिए निशुल्क उपलब्ध कराए गए। वैसे कोर्सेस जो कि घर से पढ़ाई और सर्टिफिकेट देने के लिए एक आनलाइन प्लेटफार्म हैं में अलग-अलग विवि और कोर्स की फीस अलग-अलग है। जैसे कि अमरीका की एडिनबर्ग स्टेनफोर्ड, ऑक्सफोर्ड स्टेट, यूनिवर्सिटी आफ न्यूयॉर्क , मिशिगन यूनिवर्सिटी की फीस ज्यादा है।

न्यूनतम 85 प्रतिशत अंक अनिवार्य

प्रतीक ने बताया कि सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए हर यूनिवर्सिटी का अलग कटऑफ होता है। जैसे कि जॉन हाकिंस यूनिवर्सिटी लंदन के सर्टिफिकेट के लिए परीक्षा में कम से कम 85 प्रतिशत अंक पाना होता है। इसके बाद ही यूनिवर्सिटी द्वारा उस कोर्स के लिए सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। सभी सर्टिफिकेट के नीचे में क्रेडेंशियल और आईडी होती हैं जो कि इंटरनेट पर क्रास चेक किए जा सकते हैं। आईडी ऑनलाइन डालते ही संबंधित छात्र का नाम और सर्टिफिकेट ओपन हो जाता है।

भारत क्या पूरे विश्व के ऐसे पहले छात्र

प्रतीक ने बताया कि कोर्स और इंटर्नशिप करने के दौरान उनको तो पता भी नहीं था कि वह रिकॉर्ड बनाते जा रहे हैं। बस उन्होंने यूट्यूब पर सर्च किया कि क्या किसी और ने पूरे देश में इतने कम उम्र में डेढ़ सौ से अधिक सर्टिफिकेट कोर्स विदेशी यूनिवर्सिटी से इतने कम समय में कर लिए हैं। पता चला कि सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में ऐसा किसी ने नहीं किया है। इसके बाद इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अप्लाई करने का आईडिया आया। जिसमें उनके कॉलेज के प्रोफेसरों ने भी सहयोग किया। हाल ही में उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज हो गया है।

बड़ी विदेशी कंपनियों से मिल रहे ऑफर

प्रतीक ने हाल ही में बीआईटी दुर्ग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक कंप्लीट किया है। ग्रेजुएट होने के साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के बाद बहुत सारी देशी-विदेशी कंपनियों से ऑफर भी आने लगे हैं। जैसे कि बोस्टन कंसलटिंग ग्रुप, जॉन हॉलैंड, गोल्डमैन क्वालिटी इन कंपनियों में पार्ट टाइम और फुल टाइम काम करने के ऑफर आ चुके हैं। साथ ही बहुत सारी यूनिवर्सिटीज में अच्छे परसेंट होने की वजह से बड़े कोर्स में एडमिशन नि:शुल्क मिल रहा है। साथ ही कॉलेज कैंपस और ओपन प्लेसमेंट के दौरान जॉब इंटरव्यू में भी प्राथमिकता मिल रही है। प्रतीक फिलहाल चार कंपनियों में काम कर रहे हैं। इसमें महिंद्रा एंड महिंद्रा ऑटोमोबाइल, टेक महिंद्रा, एसजीएस कंसलटिंग (अमेरिका) और लीप इंडिया लॉजिस्टिक्स हैं।

डाटा साइंस, अप्लाइड मैथमेटिक्स पर रिसर्च

प्रतीक ने बताया कि सभी कोर्स ऑनलाइन किए गए। इस दौरान गूगल, माइक्रोसॉफ्ट से बेसिक कोर्स भी किए गए। प्रतीक ने इस दौरान डाटा साइंस, अप्लाइड मैथमेटिक्स, साइकोलाजी, लैंग्वेज सी प्लस प्लस और रिसर्च कोर्स भी किए। प्रतीक आईआईटी के माध्यम से साइंटिस्ट बनना चाहते हैं। प्रतीक की माता श्रीमती रीता गायकवाड़ बिलासा कन्या महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, वहीं पिता जय गायकवाड़ सहारा प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत हैं।

कोरोना के कारण जब लाॅकडाउन लगा था। घर से बाहर निकलने पर पाबंदी थी। चारों तरफ त्राहिमाम मचा था। स्कूल-कालेज, कामकाज सब बंद। लोग डिप्रेशन में थे। हजारों की काउंसलिंग करनी पड़ी। ऐसे में बिलासपुर के छात्र प्रतीक गायकवाड़ ने ऐसा कारनामा कर दिखाया जो न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि, देश-दुनिया को यह सिखा सकता है कि जब नकारात्मक भाव हावी हों, तब उसे अवसर में कैसे बदलें।

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