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सरकार और किसानों के बीच बैठक, किसान बोले हम सरकार के साथ

सरकार और किसानों के बीच बैठक, किसान बोले हम सरकार के साथ

किसान और सरकार की मीटिंग (प्रतीकात्मक फोटो)किसान और सरकार की मीटिंग (प्रतीकात्मक फोटो)

केंद्र से उठाव-मिलिंग की अनुमित नहीं होने से समितियों में जाम धान से परेशान राज्य सरकार ने गुरुवार को किसानों के साथ मैराथन मंथन किया। इस दौरान किसानों ने कहा कि इस मुद्दे पर राज्य और केंद्र में टकराव किसानों के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि वे राज्य सरकार के साथ खड़े हैं। बारदाना संकट में भी साथ हैं लेकिन सरकार को चाहिए की खरीदी की तारीख में इजाफा करे ताकि किसानों को राहत मिल सके। वर्तमान में 31 जनवरी तक धान खरीदी होनी है।

ग्राम पथरी निवासी किसान ईश्वर बघेल ने हरिभूमि से चर्चा में कहा कि प्रदेश में इस समय धान से जुड़े दो विषय ऐसे हैं जिसकी वजह से धान खरीदी से जुड़ी पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। पहला मुद्दा ये कि केंद्र सरकार एफसीआई को राज्य के मिलरों से चावल लेने की अनुमति नहीं दे रही। दूसरी बात ये कि केंद्र सरकार ने राज्य को कम मात्रा में बारदाने उपलब्ध कराए हैं।

इसके कारण धान खरीदी में दिक्कत आ रही है। उन्होंने कहा है कि धान के मामले में दोनों सरकारों को मिलकर काम करना चाहिए। कोशिश ये हो कि किसानों को परेशानी का सामना न करना पड़े। यहां कांग्रेस-भाजपा की राजनीति का सवाल नहीं है। अन्न उत्पादक किसानों के जीवन से जुड़ा मुद्दा महत्वपूर्ण है।

धान खरीदी की अवधि बढ़ाने की मांग

किसान नेता द्वारिका साहू ने कहा है कि बारदानों की कमी की स्थिति में किसान अपने पास से बारदाना देने को तैयार हैं। उन्होंने धान खरीदी के लिए समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। हमने राज्य सरकार को पूरा सहयोग देने को कहा है। सुझाव आए हैं कि दबाव बढ़ाने के लिए भाजपा सांसदों का घेराव कर ज्ञापन सौंपा जाए। राज्यपाल से मिलकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन दिया जाए ताकि चावल जमा करने का आदेश जारी हो। किसान दिल्ली जाकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन को भी तैयार हैं।

मंत्रियों की समिति ने सुनी किसानों की बात

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने गुरुवार को मंत्रालय में एफसीआई द्वारा चावल जमा नहीं करने और बारदाने की कमी के कारण धान खरीदी में आ रही दिक्कतों के संबंध में सक्रिय किसान संगठनों से चर्चा की। मंत्रियों ने किसानों को खरीदी की व्यवस्था और केंद्र सरकार के साथ हुई बातचीत और मौजूदा संंकट की पूरी जानकारी दी। मंत्रियों ने इससे निपटने के लिए किसानों से सुझाव मांगे। किसानों ने कहा कि वे राज्य सरकार के साथ हैं। जरूरत पड़ी तो दिल्ली जाकर भी प्रदर्शन करने को तैयार हैं। इस मंत्रिमंडलीय उपसमिति में सरकार के मंत्री रविंद्र चौबे, मोहम्मद अकबर, डाॅ. प्रेमसाय सिंह, अमरजीत भगत, उमेश पटेल शामिल हैं।

उपसमिति अब सीएम को देगी रिपोर्ट

मंत्रालय में करीब 3 घंंटे तक चली बैठक के बाद कृषिमंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि किसान सरकार के हर कदम के साथ हैं। धान खरीदी प्रभावित न हो इसके लिए उन्होंने कुछ सुझाव दिए हैं। किसानों ने धरना-प्रदर्शन से लेकर धान खरीदी की सुचारू व्यवस्था की मांग करने दिल्ली जाने तक की बात कही है। कृषिमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से आग्रह के बाद भी आज की तारीख तक चावल जमा करने की अनुमति नहीं मिली हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा ही रहा तो धान खरीदी प्रभावित हो सकती है। बैठक में आए सुझावों को मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा। उसके बाद ही कोई फैसला होगा।

केंद्र से उठाव-मिलिंग की अनुमित नहीं होने से समितियों में जाम धान से परेशान राज्य सरकार ने गुरुवार को किसानों के साथ मैराथन मंथन किया। इस दौरान किसानों ने कहा कि इस मुद्दे पर राज्य और केंद्र में टकराव किसानों के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि वे राज्य सरकार के साथ खड़े हैं।

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