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सहकारी समितियों के पुनर्गठन पर 415 आपत्तियां, निराकरण के बाद जारी होगी अधिसूचना

रायपुर. छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ की गई प्राथमिक कृषि साख सहकारी सोसाइटियों के पुनर्गठन की योजना पर दावा-आपत्ति मंगाए जाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इनके निराकरण की बारी है। सहकारिता से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पुनगर्ठन को लेकर 415 आपत्तियां आई हैं। बताया गया है कि इनके निराकरण का काम किया जा रहा है, लेकिन कोरोना लॉकडाउन के कारण यह काम प्रभावित हुआ है। दावा-आपत्तियों का परीक्षण करने के साथ ही उनका निराकरण किया जाएगा। इसके बाद अधिसूचना जारी की जाएगी।

प्रदेश में बढ़ेगी 712 सोसाइटियां

पुनर्गठन से पहले वर्तमान में प्रदेश में 1333 सोसाइटियां अस्तित्व में हैं। पुनर्गठन के बाद 712 सहकारी समितियां और बढ़ जाएंगी। बताया गया है कि प्रदेश में काफी साल पहले सोसाइटियों का गठन हुआ था। उसके बाद से प्रदेश में काफी बदलाव आया है। पूर्व में जब इनका गठन किया गया तो उस समय की भौगोलिक स्थिति के आधार पर सोसाइटियों के कार्यक्षेत्र व उसमें शामिल गांवों का निर्धारण किया गया था। इसके बाद राज्य बनने के बाद से लेकर अब तक प्रदेश में नई सड़कें बनने के बाद गांवों की दूरियां कम हुई हैं। प्रदेश में किसानों की संख्या भी बढ़ी है।

अभ्यावेदन निराकरण होगा इन बिंदुओं पर

अभ्यावेदन निराकरण के लिए नवीन सोसाइटी के गठन के संबंध में कुछ मार्गदर्शी बिंदु भी तय किए गए हैं, जिसमें सोसाइटी का ऋण वितरण सामान्य क्षेत्र के लिए 2 करोड़ और अनुसूचित क्षेत्रों के समितियों के लिए एक करोड़ रुपए होगा। सोसाइटी के कार्यक्षेत्र में कृषि योग्य रकबा सामान्य क्षेत्र में कार्यरत सोसाइटी के लिए 1500 हेक्टेयर और अनुसूचित क्षेत्र में कार्यरत सोसाइटी के लिए 2000 हेक्टेयर होगा। सामान्य क्षेत्र में कार्यरत सोसाइटी के लिए 10 किलोमीटर तथा अनुसूचित क्षेत्र में कार्यरत सोसाइटी के लिए 20 किलोमीटर होगा। सोसाइटी की न्यूनतम सदस्यता 750 होगी।

दो तहसीलों में नहीं होगा सोसाईटी का कार्यक्षेत्र

पुनर्गठन में ग्राम पंचायत एवं पटवारी हल्का का विखंडन न हो अर्थात एक ग्राम पंचायत और एक पटवारी हल्का के समस्त ग्राम एक ही सोसाइटी में हो। सोसाइटी का कार्यक्षेत्र दो विकासखण्डों या दो तहसीलों में न हो। सोसाइटी के ग्राम यथासंभव एक ही विधानसभा क्षेत्र में हों। सोसाइटी मुख्यालय में पहुंच हेतु नदी, नाले आदि बाधक न हों। सोसाइटी का मुख्यालय यथासंभव वहीं हो, जहां पर गोदाम, अन्य आधारभूत संरचना निर्मित हों।

प्रदेश में बढ़ जाएंगी 712 सोसाइटियां, फिलहाल 1333 सोसाइटियां संचालित हो रहीं, अब तक 1333 सोसाइटियां कर रही हैं काम

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