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सात दशकों में पहली बार महिला को मृत्युदंड की सजा, जानें पूरा मामला

सात दशकों में पहली बार महिला को मृत्युदंड की सजा, जानें पूरा मामला

वॉशिंग्टन। एक अमेरिकन महिला को बालक चोरी करने के लिए एक गर्भवती महिला की हत्या करने को लेकर बुधवार को प्राणघातक इंजेक्शन देकर मृत्युदंड की सजा दी गई। अमेरिकी शासकों द्वारा सात दशकों में पहली बार एक महिला को मृत्युदंड की सजा दी गई। अमेरिकी न्याय विभाग ने बताया कि 52 वर्षीय लिसा मोन्टगोमरी को इंडिया के तेरे हौत्ते में सजा के बाद मृत घोषित किया गया। फेडरल ज्यूरी ने सुनायी मृत्युदंड की सजा दी गई। आखिरी घड़ी में मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था। लेकिन प्रमुख ट्रम्प की सरकार ने मृत्युदंड को समर्थन देने वाली याचिका दायर करने के बाद अमेरिकी सुप्रीक कोर्ट ने सजा देने का रास्ता साफ हो गया। लिसा का बचाव कर रहे है लेकिन उसने 2004 में किए अपराध छोटा नहीं होने की बात कह रहे है। लिसा ने 23 वर्षीय गर्भवती महिला का बालक चोरी करने के लिए उस महिला की हत्या की थी। लेकिन लिसा के अधिवक्ता ने मृत्युदंड की सजा का विरोध करते हुए कह रहे थे कि 1953 के बाद पहली बार एक महिला का मृत्युदंड की सजा दी गई है।

उल्लेखनीय है कि मोन्टगोमेरी को ऐसे समय में मृत्युदंड की सजा दी गई है, जब कोरोना के कारण कोर्ट दो केस में कैदियों को जघन्य अपराध होने के बावजूद मृत्युदंड की सजा रोक दी थी। अहम बात है कि अगर बाइड मृत्युदंड के विरोधी है। उनके सत्ता में आने से पहले उसे दंड दिया गया है।

वॉशिंग्टन। एक अमेरिकन महिला को बालक चोरी करने के लिए एक गर्भवती महिला की हत्या करने को लेकर बुधवार को प्राणघातक इंजेक्शन देकर मृत्युदंड की सजा दी गई। अमेरिकी शासकों द्वारा सात दशकों में पहली बार एक महिला को मृत्युदंड की सजा दी गई। अमेरिकी न्याय विभाग ने बताया कि 52 वर्षीय लिसा मोन्टगोमरी को

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