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सूरत : टेक्सटाइल औद्योगिक इकाइयों की तुलना में मार्केटों में अधिक नौकरियां कोरोना की बली चढ़ीं

सूरत : टेक्सटाइल औद्योगिक इकाइयों की तुलना में मार्केटों में अधिक नौकरियां कोरोना की बली चढ़ीं

कोरोना ने भारत सहित अन्य सभी देशों की आर्थिक हालात खराब कर दिया है। सूरत में भी कोरोना के समय में कई लोगों की नौकरियां जाने से उनकी आर्थिक स्थिति बदतर हो चुकी हैं। इन कारीगरों की हालत जानने के लिए हुए एक सर्वे में कुछ नए तथ्य सामने आए हैं।

दो महीने में एक लाख लोग हुए नौकरी से बाहर

FOSTA और SGCCI द्वारा किए गए सर्वे में पता चला है कि सिर्फ पिछले दो महीने में सेल्समैन, साडिय़ों को फोल्डिंग करने वाले और अकाउंट का काम संभालने वाले लगभग 1 लाख लोगों ने अपनी नौकरी से हाथ धो दिया है। सर्वे में यह भी पाया गया है कि लॉक डाउन के बाद 95 प्रतिशत दुकानों में आय 70 प्रतिशत से भी कम रही है। ऐसे में व्यापारी किसी भी तरह का आर्थिक भार नहीं सहन करना चाहते।

इसके अलावा कोरोना संक्रमण के चलते पंजाब, हरियाणा, हैदराबाद, दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों से खरीददार के भी नए ऑर्डर नहीं आ रहे हैं। इस वजह से टेक्सटाइल उद्यमियों को काफी नुक़सान हो रहा है।

टेक्सटाइल उद्यमियों के मार्केट में फंसे लगभग 15,000 करोड़

व्यापारियों की सबसे बड़ी समस्या अभी बकाया रकम निकलने की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जुलाई 2019 से अब तक लगभग 15,000 करोड़ की रकम व्यापारियों का बकाया है। इस वजह से व्यापारी अन्य किसी भी तरह का आर्थिक बोझ नहीं सहन करना चाहते। इस वजह से कइयों को नौकरी से निकाला जा रहा है।

 

 

कोरोना ने भारत सहित अन्य सभी देशों की आर्थिक हालात खराब कर दिया है। सूरत में भी कोरोना के समय में कई लोगों की नौकरियां जाने से उनकी आर्थिक स्थिति बदतर हो चुकी हैं। इन कारीगरों की हालत जानने के लिए हुए एक सर्वे में कुछ नए तथ्य सामने आए हैं। दो महीने में एक

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