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स्वदेशी हैवीवेट टॉरपीडो वरुणास्त्र नौसेना में शामिल

स्वदेशी हैवीवेट टॉरपीडो वरुणास्त्र नौसेना में शामिल

विशाखापत्तनम, बिच्छू डॉट कॉम। भारतीय नौसेना का स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र के लिए इंतजार खत्म हो गया है। वरुणास्त्र की पहली खेप नौसेना के लिए रवाना कर दी गई है। इसे चलाए जाने के बाद 40 किलोमीटर के दायरे में किसी भी जहाज या पनडुब्बी की तबाही निश्चित मानी जाती है। भारत डायनामिक्स लिमिटेड ने बताया कि हैवीवेट टॉरपीडो वरुणास्त्र की पहली खेप को भारतीय नौसेना में शामिल किया जा रहा है। शनिवार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. जी सतीश रेड्डी और डीआरडीओ के अध्यक्ष ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आज एक समारोह में इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
जीपीएस से लक्ष्य खोजने वाला वरुणास्त्र 
वरुणास्त्र नामक यह पनडुब्बी रोधी टॉरपीडो जीपीएस की मदद से अपने लक्ष्य को भेद सकता है। एक टन से अधिक वजनी वरुणास्त्र अपने साथ 250 किलो तक का वॉरहेड ले जा सकता है। उसका गाइडेंस सिस्टम भी उन्नत है। भारत के पास ब्रह्मोस सुपरसोनिक एंटी-शिप और लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल भी हैं। पूरी तौर पर स्वदेशी टारपीडो वरुणास्त्र 74 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करता है। इस स्वदेशी टॉरपीडो से भारतीय जंगी जहाजों और सिंधु क्लास सबमरीन को लैस किया जाएगा। इसका वजन लगभग डेढ़ टन है। इसमें 250 किलो के हाई लेबल एक्सप्लोसिव लगे हैं। वरुणास्त्र में लगे ट्रांसड्यूसर्स इसको हमले के ज्यादा बड़ा एरिया प्रदान करते हैं।यही कारण है कि ‘वरुणास्त्र’ किसी भी सबमरीन पर ऊपर या नीचे दोनों तरफ से हमला कर सकता है। इसमें जीपीएस लोकेटिंग सिस्टम लगा हुआ है, जिसकी वजह से इसका निशाना अचूक हो जाता है।

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