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Chhath puja 2020: जानें क्या है खरना और इसकी व्रत विधि

Chhath puja 2020: जानें क्या है खरना और इसकी व्रत विधि

कोलकाता डेस्कः खरना के साथ आज छठ पूजा का निर्जला व्रत शुरू हो चुका है। खरना का मतलब शुद्धिकरण होता है। दरअसल, जो व्यक्ति छठ का व्रत करता है उसे इस पर्व के पहले दिन यानी नहाय-खाय वाले दिन पूरा दिन उपवास रखना होता है। इस दिन केवल एक ही समय भोजन किया जाता है।

यह शरीर से लेकर मन तक सभी को शुद्ध करने का प्रयास होता है। इसकी पूर्णता अगले दिन होती है। इसी के चलते इसे खरना कहा जाता है। खरना के दिन व्रती साफ मन से अपने कुलदेवता और छठ मैय्या की पूजा करते हैं। साथ ही गुड़ से बनी खीर का प्रसाद भी अर्पित करते हैं।

खरना के दिन शाम के समय गन्ने का जूस या गुड़ के कच्चे चावल या गुड़ की खीर का प्रसाद बनाया जाता है। इस दिन जो प्रसाद बनाया जाता है उसे मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर बनाया जाता है। खीर के साथ घी चुपड़ी रोटी और कटे हुए फलों का प्रसाद भगवान सूर्य को अर्पित किया जाएगा।

रसिया को केले के पत्ते में मिट्टी के ढकनी में रखकर मां षष्ठी को भोग लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि मां षष्ठी एकांत व शांत रहने पर ही भोग ग्रहण करती हैं। इस प्रसाद को फिर परिवार के सभी लोगों को बांटा जाता है। इस प्रसाद को खाने के बाद व्रती को 36 घंटे का निर्जला व्रत करना होता है। खरना के बाद 21 नवंबर की सुबह अर्घ्य देने के बाद ही व्रत करने वाले जल और अन्न ग्रहण करेंगे।

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