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Mahatma Gandhi Jayanti 2020: महात्मा गांधी के खानपान के बारे में जानने के लिए यहां पढ़ें

Mahatma Gandhi Jayanti 2020: महात्मा गांधी के खानपान के बारे में जानने के लिए यहां पढ़ें

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गांधी जयंती देशभर में हर साल दो अक्टूबर को महात्मा गांधी जी के जन्मदिन के अवसर पर मनाई जाती है। इस दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है। मोहनदास कर्मचंद गांधी 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में पैदा हुए थे। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में गांधी जी अमूल्य योगदान और अहिंसा के तरीके के कारण उन्हें याद किया जाता है। 1930 में उन्होंने दांडी मार्च किया था। इसके बाद 1942 में उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की। 

गांधी जी चीनी से करते थे परहेज

महात्मा गांधी अपने सादा-जीवन और उच्च विचारों के चलते दुनियाभर में अहिंसा के पुजारी के रूप में पूजे जाते हैं। वे शाकाहारी थे और तामसी भोजन से दूरी बनाए रखते थे। अपने जीवन के एक वक्त में उन्होंने चाय और कॉफी तक का त्याग कर दिया था। खानपान के साथ गांधी जी ने बहुत तरह के प्रयोग किए। इतने प्रयोग शायद ही दुनिया के किसी शख्स ने किए होंगे। आपको बताते चलें कि महात्मा गांधी चीनी से परहेज करते थे, लेकिन उन्हें एक फल खूब पसंद थे। भारतवासियों के दिलों में बसने वाले गांधीजी को फलों का राजा आम बहुत पसंद था। कई जगहों पर जिक्र है कि गांधीजी आमों के प्रति अपनी तृष्णा पर संयम नहीं रख पाते थे। कई पत्रों में खुद ही बापू ने अपने इस अतिरेक के लिए अफसोस जताया है। 

आम को सबसे ज्यादा पसंद करते थे महात्मा गांधी

गांधीजी चीनी के सेवन से परहेज करते थे, लेकिन फलों का राजा आम उनका पसंदीदा फल था। साल 1941 में गांधीजी ने लिखा था कि आम एक शापित फल है। यह सारे फलों में अपनी तरफ सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है। वह खानपान को विशेष महत्व देते थे।

आजादी मिलने पर रखा था उपवास

बापू का मानना था कि जिस तरह जिंदा रहने के लिए हमें शुद्ध हवा और पानी की जरूरत पड़ती है, उसी तरह से शरीर को भी पौष्टिक तत्वों की जरूरत होती है। महात्मा गांधी का जन्म शाकाहारी परिवार में हुआ था। हालांकि लेखक हेनरी स्टीफंस सॉल्ट का उनके शाकाहार प्रयोग पर विशेष प्रभाव था। सॉल्ट के प्रभाव से ही महात्मा गांधी ने अपनी मर्जी से शाकाहारी भोजन चुना।  आपको बता दें कि गांधीजी ने आजादी मिलने से पहले कई मौकों पर उपवास रखे। आजादी के आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने 17 बार उपवास रखा। उनका सबसे लंबा उपवास 21 दिन का था। महात्मा गांधी ने 1913 से लेकर 1948 के दौरान ये सारे उपवास रखे थे। यानी की आजादी मिलने के बाद भी उन्होंने उपवास रखा था।

गांधी जयंती देशभर में हर साल दो अक्टूबर को महात्मा गांधी जी के जन्मदिन के अवसर पर मनाई जाती है। इस दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है। मोहनदास कर्मचंद गांधी 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में पैदा हुए थे।

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